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Thursday, 20 February 2020

कुछ शेर-4

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(1)
ऐ सितमगर मेरे इस हौसले की दाद दें,
सामने तेरे अगर फरियाद कर लेता हूँ मैं।

(2)
नहीं है राज कोई राज दीदावर के लिये,
नकाब पर्दा नहीं शौक की नजर के लिये।

(3)
बला है कहर है आफत है फित्ना है कयामत है,
हसीनों की जवानी को, जवानी कौन कहता है?

(4)
मिल गया आखिर निशाने-मंजिले-मकसूद मगर,
अब यह रोना है कि शौके-जुस्तजू जाता रहा।

(5)
यह किसने कह दिया गुमराह कर देता है मैखाना ,
खुदा की फजल से इसके लिए मंदिर हैं, मस्जिद हैं।


कुछ शेर-2

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(1)
यूँ मुतमइन1 आये हैं खाकर जिगर पै चोट,
जैसे वहाँ गये थे इसी मुद्दआ के साथ।

(2)
रहबर या तो रहजन2 निकले या हैं अपने आप में गुम,
काफले वाले किससे पूछें किस मंजिल तक जाना है।

(3)
वफा पर मिटने वाले जान की परवा नहीं करते,
वह इस बाजार में सूदो-जियो3 देखा नहीं करते।

(4)
वह मर्द नहीं जो डर जाये, माहौल के खूनी खंजर4 से,
उस हाल में जीना लाजिम है जिस हाल में जीना मुश्किल है।

(5)
गुल भी हैं गुलिस्ताँ भी है मौजूद,
इक फकत आशियाँ नहीं मिलता।


कुछ शेर-1

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(1)
जिन्दगी कशमकशे-इश्क के आगाज का नाम,
मौत अंजाम है इसी दर्द के अफसाने का।

(2)
जिस गम से दिल को राहत हो, उस गम का मुदावा क्या मानी?
जब फितरत तूफानी ठहरी, साहिल की तमन्ना क्या मानी?

(3)
तसन्नो की फुसूंकारी का कुछ ऐसा असर देखा,
कि यह दुनिया मुझे दुनियानुमां मालूम होती हैं।

(4)
न आने दिया राह पर रहबरों ने,
किये लाख मंजिल ने हमको इशारे।

(5)
किसका कुर्ब,कहाँ की दूरी, अपने आप में गाफिल हैं,
राज अगर पाने का पूछो, खो जाना ही पाना है।


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