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Monday, 3 December 2018
आनीले कु्मभ भराईले ऊदक ठाकुर कउ इसनानु करउ
आनीले कु्मभ भराईले ऊदक ठाकुर कउ इसनानु करउ ॥
बइआलीस लख जी जल महि होते बीठलु भैला काइ करउ ॥1॥
जत्र जाउ तत बीठलु भैला ॥
महा अनंद करे सद केला ॥1॥रहाउ॥
आनीले फूल परोईले माला ठाकुर की हउ पूज करउ ॥
पहिले बासु लई है भवरह बीठल भैला काइ करउ ॥2॥
आनीले दूधु रीधाईले खीरं ठाकुर कउ नैवेदु करउ ॥
पहिले दूधु बिटारिओ बछरै बीठलु भैला काइ करउ ॥3॥
ईभै बीठलु ऊभै बीठलु बीठल बिनु संसारु नही ॥
थान थनंतरि नामा प्रणवै पूरि रहिओ तूं सरब मही ॥4॥2॥
बइआलीस लख जी जल महि होते बीठलु भैला काइ करउ ॥1॥
जत्र जाउ तत बीठलु भैला ॥
महा अनंद करे सद केला ॥1॥रहाउ॥
आनीले फूल परोईले माला ठाकुर की हउ पूज करउ ॥
पहिले बासु लई है भवरह बीठल भैला काइ करउ ॥2॥
आनीले दूधु रीधाईले खीरं ठाकुर कउ नैवेदु करउ ॥
पहिले दूधु बिटारिओ बछरै बीठलु भैला काइ करउ ॥3॥
ईभै बीठलु ऊभै बीठलु बीठल बिनु संसारु नही ॥
थान थनंतरि नामा प्रणवै पूरि रहिओ तूं सरब मही ॥4॥2॥
एक अनेक बिआपक पूरक जत देखउ तत सोई
एक अनेक बिआपक पूरक जत देखउ तत सोई ॥
माइआ चित्र बचित्र बिमोहित बिरला बूझै कोई ॥1॥
सभु गोबिंदु है सभु गोबिंदु है गोबिंद बिनु नही कोई ॥
सूतु एकु मणि सत सहंस जैसे ओति पोति प्रभु सोई ॥1॥रहाउ॥
जल तरंग अरु फेन बुदबुदा जल ते भिंन न होई ॥
इहु परपंचु पारब्रहम की लीला बिचरत आन न होई ॥2॥
मिथिआ भरमु अरु सुपन मनोरथ सति पदारथु जानिआ ॥
सुक्रित मनसा गुर उपदेसी जागत ही मनु मानिआ ॥3॥
कहत नामदेउ हरि की रचना देखहु रिदै बीचारी ॥
घट घट अंतरि सरब निरंतरि केवल एक मुरारी ॥4॥1॥485॥
माइआ चित्र बचित्र बिमोहित बिरला बूझै कोई ॥1॥
सभु गोबिंदु है सभु गोबिंदु है गोबिंद बिनु नही कोई ॥
सूतु एकु मणि सत सहंस जैसे ओति पोति प्रभु सोई ॥1॥रहाउ॥
जल तरंग अरु फेन बुदबुदा जल ते भिंन न होई ॥
इहु परपंचु पारब्रहम की लीला बिचरत आन न होई ॥2॥
मिथिआ भरमु अरु सुपन मनोरथ सति पदारथु जानिआ ॥
सुक्रित मनसा गुर उपदेसी जागत ही मनु मानिआ ॥3॥
कहत नामदेउ हरि की रचना देखहु रिदै बीचारी ॥
घट घट अंतरि सरब निरंतरि केवल एक मुरारी ॥4॥1॥485॥
(पूरक =भरपूर, मणि=मनके, सत=सैंकड़े, सहंस=हज़ारों,
तरंग=लहर, फेन=झाग, परपंचु=दिखता जगत तमाशा,
बिचरत=विचार कर, आन=अप्रीचित, सति=हमेशा रहने वाला,
सुक्रित=नेकी, मनसा=समझ)
तरंग=लहर, फेन=झाग, परपंचु=दिखता जगत तमाशा,
बिचरत=विचार कर, आन=अप्रीचित, सति=हमेशा रहने वाला,
सुक्रित=नेकी, मनसा=समझ)
देवा पाहन तारीअले
देवा पाहन तारीअले ॥
राम कहत जन कस न तरे ॥1॥रहाउ॥
तारीले गनिका बिनु रूप कुबिजा बिआधि अजामलु तारीअले ॥
चरन बधिक जन तेऊ मुकति भए ॥
हउ बलि बलि जिन राम कहे ॥1॥
दासी सुत जनु बिदरु सुदामा उग्रसैन कउ राज दीए ॥
जप हीन तप हीन कुल हीन क्रम हीन नामे के सुआमी तेऊ तरे ॥2॥1॥345॥
राम कहत जन कस न तरे ॥1॥रहाउ॥
तारीले गनिका बिनु रूप कुबिजा बिआधि अजामलु तारीअले ॥
चरन बधिक जन तेऊ मुकति भए ॥
हउ बलि बलि जिन राम कहे ॥1॥
दासी सुत जनु बिदरु सुदामा उग्रसैन कउ राज दीए ॥
जप हीन तप हीन कुल हीन क्रम हीन नामे के सुआमी तेऊ तरे ॥2॥1॥345॥
( पाहन=पत्थर, कस=क्यों, गनिका=वैश्या,
कुबिजा=कंस की गोली, ब्याधि=रोगी,विकारी पुरुष,
बधिक=शिकारी जिसने कृष्ण जी के पैर में तीर
मारा था, सुत=पुत्र, तेऊ=
वह सभी)
कुबिजा=कंस की गोली, ब्याधि=रोगी,विकारी पुरुष,
बधिक=शिकारी जिसने कृष्ण जी के पैर में तीर
मारा था, सुत=पुत्र, तेऊ=
वह सभी)
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