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Thursday, 23 January 2020
आईना देखते ही वो दीवाना हो गया
आईना देखते ही वो दीवाना हो गया
देखा किसे कि शम्अ से परवाना हो गया
गुल कर के शम्अ सोए थे हम ना-मुराद आज
रौशन किसी के आने से काशाना हो गया
मुँह चूम लूँ ये किस ने कहा मुझ को देख कर
दीवाना था ही और भी दीवाना हो गया
तोड़ी थी जिस से तौबा किसी ने हज़ार बार
अफ़्सोस नज़्र-ए-तौबा वो पैमाना हो गया
मय तौबा बन के आई थी लब तक ऐ ‘रियाज़’
लबरेज़ अपनी उम्र का पैमाना हो गया
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