Showing posts with label Amir khusro. Show all posts

Thursday, 29 November 2018

दोहे अमीर खुसरो

No comments :


दोहे अमीर खुसरो


अपनी छवि बनाई के मैं तो पी के पास गई।
जब छवि देखी पीहू की सो अपनी भूल गई।।

अंगना तो परबत भयो, देहरी भई विदेस।
जा बाबुल घर आपने, मैं चली पिया के देस।।

आ साजन मोरे नयनन में, सो पलक ढाप तोहे दूँ।
न मैं देखूँ और न को, न तोहे देखन दूँ।।

उज्जवल बरन अधीन तन एक चित्त दो ध्यान।
देखत में तो साधु है पर निपट पाप की खान।।

खुसरवा दर इश्क बाजी कम जि हिन्दू जन माबाश।
कज़ बराए मुर्दा मा सोज़द जान-ए-खेस रा।।

खुसरो ऐसी पीत कर जैसे हिन्दू जोय।
पूत पराए कारने जल जल कोयला होय।।

खुसरो दरिया प्रेम का, उल्टी वा की धार।
जो उतरा सो डूब गया, जो डूबा सो पार।।

खुसरो पाती प्रेम की बिरला बाँचे कोय।
वेद, कुरान, पोथी पढ़े, प्रेम बिना का होय।।

खुसरो बाजी प्रेम की मैं खेलूँ पी के संग।
जीत गयी तो पिया मोरे हारी पी के संग।।

खुसरो मौला के रुठते, पीर के सरने जाय।
कहे खुसरो पीर के रुठते, मौला नहिं होत सहाय।।

खुसरो रैन सुहाग की, जागी पी के संग।
तन मेरो मन पियो को, दोउ भए एक रंग।।

खुसरो सरीर सराय है क्यों सोवे सुख चैन।
कूच नगारा सांस का, बाजत है दिन रैन।।

गोरी सोवे सेज पर, मुख पर डारे केस।
चल खुसरो घर आपने, सांझ भयी चहु देस।।

चकवा चकवी दो जने इन मत मारो कोय।
ये मारे करतार के रैन बिछोया होय।।

नदी किनारे मैं खड़ी सो पानी झिलमिल होय।
पी गोरी मैं साँवरी अब किस विध मिलना होय।।

पहले तिय के हीय में, डगमत प्रेम उमंग।
आगे बाती बरति है, पीछे जरत पतंग।।

पंखा होकर मैं डुली, साती तेरा चाव।
मुझ जलती का जनम गयो तेरे लेखन भाव।।

रैन बिना जग दुखी और दुखी चन्द्र बिन रैन।
तुम बिन साजन मैं दुखी और दुखी दरस बिन नैंन।।

रैनी चढ़ी रसूल की सो रंग मौला के हाथ।
जिसके कपरे रंग दिए सो धन धन वाके भाग।।

संतों की निंदा करे, रखे पर नारी से हेत।
वे नर ऐसे जाऐंगे, जैसे रणरेही का खेत।।

साजन ये मत जानियो तोहे बिछड़त मोहे को चैन।
दिया जलत है रात में और जिया जलत बिन रैन।।

श्याम सेत गोरी लिए जनमत भई अनीत।
एक पल में फिर जात है जोगी काके मीत।।

बन के पंछी भए बावरे, ऐसी बीन बजाई सांवरे।

No comments :

बन के पंछी भए बावरे, ऐसी बीन बजाई सांवरे।
तार तार की तान निराली, झूम रही सब वन की डाली। (डारी)
पनघट की पनिहारी ठाढ़ी, भूल गई खुसरो पनिया भरन को।

परबत बास मँगवा मोरे बाबुल, नीके मँडवा छाव रे

No comments :

परबत बास मँगवा मोरे बाबुल, नीके मँडवा छाव रे।
डोलिया फँदाय पिया लै चलि हैं अब संग नहिं कोई आव रे।
गुड़िया खेलन माँ के घर गई, नहि खेलन को दाँव रे।
गुड़िया खिलौना ताक हि में रह गए, नहीं खेलन को दाँव रे।
निजामुद्दीन औलिया बदियाँ पकरि चले, धरिहौं वाके पाव रे।
सोना दीन्हा रुपा दीन्हा बाबुल दिल दरियाव रे।
हाथी दीन्हा घोड़ा दीन्हा बहुत बहुत मन चाव रे।

परदेसी बालम धन अकेली मेरा बिदेसी घर आवना।

No comments :

परदेसी बालम धन अकेली मेरा बिदेसी घर आवना।
बिर का दुख बहुत कठिन है प्रीतम अब आजावना।
इस पार जमुना उस पार गंगा बीच चंदन का पेड़ ना।
इस पेड़ ऊपर कागा बोले कागा का बचन सुहावना।

ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल, दुराये नैना बनाये बतियां

No comments :

ज़िहाल-ए मिस्कीं मकुन तगाफ़ुल,
दुराये नैना बनाये बतियां ।
कि ताब-ए-हिजरां नदारम ऎ जान,
न लेहो काहे लगाये छतियां ।

शबां-ए-हिजरां दरज़ चूं ज़ुल्फ़
वा रोज़-ए-वस्लत चो उम्र कोताह,
सखि पिया को जो मैं न देखूं
तो कैसे काटूं अंधेरी रतियां ।

यकायक अज़ दिल, दो चश्म-ए-जादू
ब सद फ़रेबम बाबुर्द तस्कीं,
किसे पडी है जो जा सुनावे
पियारे पी को हमारी बतियां ।

चो शमा सोज़ान, चो ज़र्रा हैरान
हमेशा गिरयान, बे इश्क आं मेह ।
न नींद नैना, ना अंग चैना
ना आप आवें, न भेजें पतियां ।

बहक्क-ए-रोज़े, विसाल-ए-दिलबर
कि दाद मारा, गरीब खुसरौ ।
सपेट मन के, वराये राखूं
जो जाये पांव, पिया के खटियां ।

तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम

No comments :

तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम,
तोरी सूरत के बलिहारी ।
सब सखियन में चुनर मेरी मैली,
देख हसें नर नारी, निजाम...
अबके बहार चुनर मोरी रंग दे,
पिया रखले लाज हमारी, निजाम....
सदका बाबा गंज शकर का,
रख ले लाज हमारी, निजाम...
कुतब, फरीद मिल आए बराती,
खुसरो राजदुलारी, निजाम...
कौउ सास कोउ ननद से झगड़े,
हमको आस तिहारी, निजाम,
तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम...

काहे को ब्याहे बिदेस,

No comments :

काहे को ब्याहे बिदेस,
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

भैया को दियो बाबुल महले दो-महले
हमको दियो परदेस
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

हम तो बाबुल तोरे खूँटे की गैयाँ
जित हाँके हँक जैहें
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

हम तो बाबुल तोरे बेले की कलियाँ
घर-घर माँगे हैं जैहें
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

कोठे तले से पलकिया जो निकली
बीरन में छाए पछाड़
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

हम तो हैं बाबुल तोरे पिंजरे की चिड़ियाँ
भोर भये उड़ जैहें
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

तारों भरी मैनें गुड़िया जो छोडी़
छूटा सहेली का साथ
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

डोली का पर्दा उठा के जो देखा
आया पिया का देस
अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस

अरे, लखिय बाबुल मोरे
काहे को ब्याहे बिदेस
अरे, लखिय बाबुल मोरे

जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए,

No comments :

जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए,
अजहुँ न आए स्वामी हो
ऐ जो पिया आवन कह गए अजुहँ न आए।
अजहुँ न आए स्वामी हो।
स्वामी हो, स्वामी हो।
आवन कह गए, आए न बाहर मास।
जो पिया आवन कह गए अजहुँ न आए।
अजहुँ न आए।
आवन कह गए।
आवन कह गए।

जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्याँ

No comments :

जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्याँ
जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्याँ, घुँघटा में आग लगा देती,
मैं लाज के बंधन तोड़ सखी पिया प्यार को अपने मान लेती।
इन चूरियों की लाज पिया रखाना, ये तो पहन लई अब उतरत न।
मोरा भाग सुहाग तुमई से है मैं तो तुम ही पर जुबना लुटा बैठी।
मोरे हार सिंगार की रात गई, पियू संग उमंग की बात गई
पियू संत उमंग मेरी आस नई।

अब आए न मोरे साँवरिया, मैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
घर आए न तोरे साँवरिया, मैं तो तन मन उन पर लुटा देती।
मोहे प्रीत की रीत न भाई सखी, मैं तो बन के दुल्हन पछताई सखी।
होती न अगर दुनिया की शरम मैं तो भेज के पतियाँ बुला लेती।
उन्हें भेज के सखियाँ बुला लेती।
जो मैं जानती बिसरत हैं सैय्याँ।

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर

No comments :

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर
ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर ।

जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया
हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर ।

तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है
तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिली तुम आय कर ।

जाना तलब तेरी करूँ दीगर तलब किसकी करूँ
तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर ।

मेरी जो मन तुम ने लिया, तुम उठा गम को दिया
तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर ।

खुसरो कहै बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब
कुदरत खुदा की है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर ।

कह-मुकरियाँ अमीर खुसरो

No comments :

कह-मुकरियाँ अमीर खुसरो

कह-मुकरियाँ

अति सुरंग है रंग रंगीलो
है गुणवंत बहुत चटकीलो
राम भजन बिन कभी न सोता
ऐ सखि साजन ? ना सखि तोता ।।

अर्ध निशा वह आया भौन
सुंदरता बरने कवि कौन
निरखत ही मन भयो अनंद
ऐ सखि साजन ? ना सखि चंद ।।

आठ प्रहर मेरे संग रहे,
मीठी प्यारी बातें करे।
श्याम बरन और राती नैंना,
ऐ सखि साजन ? न सखि! मैंना।।

आप हिले और मोहे हिलाए
वा का हिलना मोए मन भाए
हिल हिल के वो हुआ निसंखा
ऐ सखि साजन ? ना सखि पंखा ।।

ऊंची अटारी पलंग बिछायो
मैं सोई मेरे सिर पर आयो
खुल गई अंखियां भयी आनंद
ऐ सखि साजन ? ना सखि चांद ।।

खा गया पी गया
दे गया बुत्ता
ऐ सखि साजन ?
ना सखि कुत्ता ।।

घर आवे मुख घेरे-फेरे,
दें दुहाई मन को हरें,
कभू करत है मीठे बैन,
कभी करत है रुखे नैंन।
ऐसा जग में कोऊ होता,
ऐ सखि साजन ? न सखि ! तोता।।

जब माँगू तब जल भरि लावे
मेरे मन की तपन बुझावे
मन का भारी तन का छोटा
ऐ सखि साजन ? ना सखि लोटा ।।

जीवन सब जग जासों कहै
वा बिनु नेक न धीरज रहै
हरै छिनक में हिय की पीर
ऐ सखि साजन ? ना सखि नीर ।।

नंगे पाँव फिरन नहिं देत
पाँव से मिट्टी लगन नहिं देत
पाँव का चूमा लेत निपूता
ऐ सखि साजन ? ना सखि जूता ।।

नित मेरे घर आवत है,
रात गए फिर जावत है।
मानस फसत काऊ के फंदा,
ऐ सखि साजन ? न सखि ! चंदा।।

नीला कंठ और पहिरे हरा,
सीस मुकुट नीचे वह खड़ा।
देखत घटा अलापै जोर,
ऐ सखी साजन न सखी मोर।।

पड़ी थी मैं अचानक चढ़ आयो
जब उतरयो तो पसीनो आयो
सहम गई नहीं सकी पुकार
ऐ सखि साजन ? ना सखि बुखार ।।

बखत बखत मोए वा की आस
रात दिना ऊ रहत मो पास
मेरे मन को सब करत है काम
ऐ सखि साजन ? ना सखि राम ।।

बरसा-बरस वह देस में आवे,
मुँह से मुँह लाग रस प्यावे।
वा खातिर मैं खरचे दाम,
ऐ सखि साजन ? न सखि ! आम।।

बिन आये सबहीं सुख भूले
आये ते अँग-अँग सब फूले
सीरी भई लगावत छाती
ऐ सखि साजन ? ना सखि पाती ।।

बेर-बेर सोवतहिं जगावे
ना जागूँ तो काटे खावे
व्याकुल हुई मैं हक्की बक्की
ऐ सखि साजन ? ना सखि मक्खी ।।

राह चलत मोरा अंचरा गहे।
मेरी सुने न अपनी कहे
ना कुछ मोसे झगडा-टंटा
ऐ सखि साजन ? ना सखि कांटा ।।

रात समय वह मेरे आवे
भोर भये वह घर उठि जावे
यह अचरज है सबसे न्यारा
ऐ सखि साजन ? ना सखि तारा ।।

लिपट लिपट के वा के सोई
छाती से छाती लगा के रोई
दांत से दांत बजे तो ताड़ा
ऐ सखि साजन ? ना सखि जाड़ा ।।

वो आवै तो शादी होय
उस बिन दूजा और न कोय
मीठे लागें वा के बोल
ऐ सखि साजन ? ना सखि ढोल ।।

सगरी रैन छतियां पर राख
रूप रंग सब वा का चाख
भोर भई जब दिया उतार
ऐ सखि साजन ? ना सखि हार ।।

सगरी रैन मिही संग जागा
भोर भई तब बिछुड़न लागा
उसके बिछुड़त फाटे हिया,
ए सखि साजन ? ना, सखि ! दिया(दीपक)

सरब सलोना सब गुन नीका
वा बिन सब जग लागे फीका
वा के सर पर होवे कोन
ऐ सखि साजन ? ना सखि ! लोन(नमक)

सेज पड़ी मोरे आंखों आए
डाल सेज मोहे मजा दिखाए
किस से कहूं अब मजा मैं अपना
ऐ सखि साजन ? ना सखि सपना ।।

शोभा सदा बढ़ावन हारा
आँखिन से छिन होत न न्यारा
आठ पहर मेरो मनरंजन
ऐ सखि साजन ? ना सखि अंजन ।।

Tuesday, 22 August 2017

हजरत ख्वाजा संग खेलिए धमाल

No comments :

हजरत ख्वाजा संग खेलिए धमाल,
बाइस ख्वाजा मिल बन बन आयो
तामें हजरत रसूल साहब जमाल।
हजरत ख्वाजा संग..।
अरब यार तेरो (तोरी) बसंत मनायो,
सदा रखिए लाल गुलाल।
हजरत ख्वाजा संग खेलिए धमाल।

hajarat khvaaja sang khelie dhamaal,
bais khvaaja mil ban ban aayo
taamen hajarat rasool saahab jamaal.
hajarat khvaaja sang...
arab yaar tero (toree) basant manaayo,
sada rakhie laal gulaal.
hajarat khvaaja sang khelie dhamaal.

Saturday, 19 August 2017

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर

No comments :

जब यार देखा नैन भर दिल की गई चिंता उतर
ऐसा नहीं कोई अजब राखे उसे समझाए कर ।

जब आँख से ओझल भया, तड़पन लगा मेरा जिया
हक्का इलाही क्या किया, आँसू चले भर लाय कर ।

तू तो हमारा यार है, तुझ पर हमारा प्यार है
तुझ दोस्ती बिसियार है एक शब मिली तुम आय कर ।

जाना तलब तेरी करूँ दीगर तलब किसकी करूँ
तेरी जो चिंता दिल धरूँ, एक दिन मिलो तुम आय कर ।

मेरी जो मन तुम ने लिया, तुम उठा गम को दिया
तुमने मुझे ऐसा किया, जैसा पतंगा आग पर ।

खुसरो कहै बातों ग़ज़ब, दिल में न लावे कुछ अजब
कुदरत खुदा की है अजब, जब जिव दिया गुल लाय कर ।

jab yaar dekha nain bhar dil kee gaee chinta utar
aisa nahin koee ajab raakhe use samajhae kar .

jab aankh se ojhal bhaya, tadapan laga mera jiya
hakka ilaahee kya kiya, aansoo chale bhar laay kar .

too to hamaara yaar hai, tujh par hamaara pyaar hai
tujh dostee bisiyaar hai ek shab milee tum aay kar .

jaana talab teree karoon deegar talab kisakee karoon
teree jo chinta dil dharoon, ek din milo tum aay kar .

meree jo man tum ne liya, tum utha gam ko diya
tumane mujhe aisa kiya, jaisa patanga aag par .

khusaro kahai baaton gazab, dil mein na laave kuchh ajab
kudarat khuda kee hai ajab, jab jiv diya gul laay kar .

दैया री मोहे भिजोया री

No comments :

दैया री मोहे भिजोया री
शाह निजाम के रंग में।
कपरे रंगने से कुछ न होवत है
या रंग में मैंने तन को डुबोया री
पिया रंग मैंने तन को डुबोया
जाहि के रंग से शोख रंग सनगी
खूब ही मल मल के धोया री।
पीर निजाम के रंग में भिजोया री।

daiya ree mohe bhijoya ree
shaah nijaam ke rang mein.
kapare rangane se kuchh na hovat hai
ya rang mein mainne tan ko duboya ree
piya rang mainne tan ko duboya
jaahi ke rang se shokh rang sanagee
khoob hee mal mal ke dhoya ree.
peer nijaam ke rang mein bhijoya ree.

बहुत रही बाबुल घर दुल्हन

No comments :

बहुत रही बाबुल घर दुल्हन, चल तोरे पी ने बुलाई।
बहुत खेल खेली सखियन से, अन्त करी लरिकाई।
न्हाय धोय के बस्तर पहिरे, सब ही सिंगार बनाई।
बिदा करन को कुटुम्ब सब आए, सगरे लोग लुगाई।
चार कहार मिल डोलिया उठाई, संग परोहत नाई।
चले ही बनेगी होत कहाँ है, नैनन नीर बहाई।
अन्त बिदा हो चलि है दुल्हिन, काहू कि कछु न बने आई।
मौज-खुसी सब देखत रह गए, मात पिता और भाई।
मोरी कौन संग लगन धराई, धन-धन तेरि है खुदाई।
बिन मांगे मेरी मंगनी जो कीन्ही, नेह की मिसरी खिलाई।
अंगुरि पकरि मोरा पहुँचा भी पकरे, कँगना अंगूठी पहिराई।
एक के नाम कर दीनी सजनी, पर घर की जो ठहराई।
नौशा के संग मोहि कर दीन्हीं, लाज संकोच मिटाई।
सोना भी दीन्हा रुपा भी दीन्हा बाबुल दिल दरियाई।
गहेल गहेली डोलति आँगन मा पकर अचानक बैठाई।
बैठत महीन कपरे पहनाये, केसर तिलक लगाई।
गुण नहीं एक औगुन बहोतेरे, कैसे नोशा रिझाई।
खुसरो चले ससुरारी सजनी संग, नहीं कोई आई।

bahut rahee baabul ghar dulhan, chal tore pee ne bulaee.
bahut khel khelee sakhiyan se, ant karee larikaee.
nhaay dhoy ke bastar pahire, sab hee singaar banaee.
bida karan ko kutumb sab aae, sagare log lugaee.
chaar kahaar mil doliya uthaee, sang parohat naee.
chale hee banegee hot kahaan hai, nainan neer bahaee.
ant bida ho chali hai dulhin, kaahoo ki kachhu na bane aaee.
mauj-khusee sab dekhat rah gae, maat pita aur bhaee.
moree kaun sang lagan dharaee, dhan-dhan teri hai khudaee.
bin maange meree manganee jo keenhee, neh kee misaree khilaee.
anguri pakari mora pahuncha bhee pakare, kangana angoothee pahiraee.
ek ke naam kar deenee sajanee, par ghar kee jo thaharaee.
nausha ke sang mohi kar deenheen, laaj sankoch mitaee.
sona bhee deenha rupa bhee deenha baabul dil dariyaee.
gahel gahelee dolati aangan ma pakar achaanak baithaee.
baithat maheen kapare pahanaaye, kesar tilak lagaee.
gun nahin ek augun bahotere, kaise nosha rijhaee.
khusaro chale sasuraaree sajanee sang, nahin koee aaee.

Friday, 18 August 2017

आज रंग है ऐ माँ रंग है री,

No comments :

आज रंग है ऐ माँ रंग है री,
मेरे महबूब के घर रंग है री।
अरे अल्लाह तू है हर,
मेरे महबूब के घर रंग है री।

मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया,
निजामुद्दीन औलिया-अलाउद्दीन औलिया।
अलाउद्दीन औलिया, फरीदुद्दीन औलिया,
फरीदुद्दीन औलिया, कुताबुद्दीन औलिया।
कुताबुद्दीन औलिया मोइनुद्दीन औलिया,
मुइनुद्दीन औलिया मुहैय्योद्दीन औलिया।
आ मुहैय्योदीन औलिया, मुहैय्योदीन औलिया।
वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री।

अरे ऐ री सखी री,
वो तो जहाँ देखो मोरो (बर) संग है री।
मोहे पीर पायो निजामुद्दीन औलिया,
आहे, आहे आहे वा।
मुँह माँगे बर संग है री,
वो तो मुँह माँगे बर संग है री।

निजामुद्दीन औलिया जग उजियारो,
जग उजियारो जगत उजियारो।
वो तो मुँह माँगे बर संग है री।
मैं पीर पायो निजामुद्दीन औलिया।
गंज शकर मोरे संग है री।
मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखयो सखी री।
मैं तो ऐसी रंग देस-बदेस में ढूढ़ फिरी हूँ,
देस-बदेस में।
आहे, आहे आहे वा,
ऐ गोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मुँह माँगे बर संग है री।

सजन मिलावरा इस आँगन मा।
सजन, सजन तन सजन मिलावरा।
इस आँगन में उस आँगन में।
अरे इस आँगन में वो तो, उस आँगन में।
अरे वो तो जहाँ देखो मोरे संग है री।
आज रंग है ए माँ रंग है री।

ऐ तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मैं तो तोरा रंग मन भायो निजामुद्दीन।
मुँह माँगे बर संग है री।
मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी सखी री।
ऐ महबूबे इलाही मैं तो ऐसो रंग और नहीं देखी।
देस विदेश में ढूँढ़ फिरी हूँ।
आज रंग है ऐ माँ रंग है ही।
मेरे महबूब के घर रंग है री।

aaj rang hai ai maan rang hai ree,
mere mahaboob ke ghar rang hai ree.
are allaah too hai har,
mere mahaboob ke ghar rang hai ree.

mohe peer paayo nijaamuddeen auliya,
nijaamuddeen auliya-alauddeen auliya.
alauddeen auliya, phareeduddeen auliya,
phareeduddeen auliya, kutaabuddeen auliya.
kutaabuddeen auliya moinuddeen auliya,
muinuddeen auliya muhaiyyoddeen auliya.
aa muhaiyyodeen auliya, muhaiyyodeen auliya.
vo to jahaan dekho more sang hai ree.

are ai ree sakhee ree,
vo to jahaan dekho moro (bar) sang hai ree.
mohe peer paayo nijaamuddeen auliya,
aahe, aahe aahe va.
munh maange bar sang hai ree,
vo to munh maange bar sang hai ree.

nijaamuddeen auliya jag ujiyaaro,
jag ujiyaaro jagat ujiyaaro.
vo to munh maange bar sang hai ree.
main peer paayo nijaamuddeen auliya.
ganj shakar more sang hai ree.
main to aiso rang aur nahin dekhayo sakhee ree.
main to aisee rang des-bades mein dhoodh phiree hoon,
des-bades mein.
aahe, aahe aahe va,
ai gora rang man bhaayo nijaamuddeen.
munh maange bar sang hai ree.

sajan milaavara is aangan ma.
sajan, sajan tan sajan milaavara.
is aangan mein us aangan mein.
are is aangan mein vo to, us aangan mein.
are vo to jahaan dekho more sang hai ree.
aaj rang hai e maan rang hai ree.

ai tora rang man bhaayo nijaamuddeen.
main to tora rang man bhaayo nijaamuddeen.
munh maange bar sang hai ree.
main to aiso rang aur nahin dekhee sakhee ree.
ai mahaboobe ilaahee main to aiso rang aur nahin dekhee.
des videsh mein dhoondh phiree hoon.
aaj rang hai ai maan rang hai hee.
mere mahaboob ke ghar rang hai ree.

Friday, 11 August 2017

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए

No comments :

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए
भाग लगे इस आँगन को
बल-बल जाऊँ मैं अपने पिया के,
चरन लगायो निर्धन को।
मैं तो खड़ी थी आस लगाए,
मेंहदी कजरा माँग सजाए।
देख सूरतिया अपने पिया की,
हार गई मैं तन मन को।
जिसका पिया संग बीते सावन,
उस दुल्हन की रैन सुहागन।
जिस सावन में पिया घर नाहि,
आग लगे उस सावन को।
अपने पिया को मैं किस विध पाऊँ,
लाज की मारी मैं तो डूबी डूबी जाऊँ
तुम ही जतन करो ऐ री सखी री,
मै मन भाऊँ साजन को।


ai ree sakhee more piya ghar aae
bhaag lage is aangan ko
bal-bal jaoon main apane piya ke,
charan lagaayo nirdhan ko.
main to khadee thee aas lagae,
menhadee kajara maang sajae.
dekh sooratiya apane piya kee,
haar gaee main tan man ko.
jisaka piya sang beete saavan,
us dulhan kee rain suhaagan.
jis saavan mein piya ghar naahi,
aag lage us saavan ko.
apane piya ko main kis vidh paoon,
laaj kee maaree main to doobee doobee jaoon
tum hee jatan karo ai ree sakhee ree,
mai man bhaoon saajan ko.

Wednesday, 9 August 2017

बहुत दिन बीते पिया को देखे,

No comments :

बहुत दिन बीते पिया को देखे,
अरे कोई जाओ, पिया को बुलाय लाओ
मैं हारी वो जीते पिया को देखे बहुत दिन बीते ।

सब चुनरिन में चुनर मोरी मैली,
क्यों चुनरी नहीं रंगते ?
बहुत दिन बीते ।
खुसरो निजाम के बलि बलि जइए,
क्यों दरस नहीं देते ?
बहुत दिन बीते ।


bahut din beete piya ko dekhe,
are koee jao, piya ko bulaay lao
main haaree vo jeete piya ko dekhe bahut din beete .

sab chunarin mein chunar moree mailee,
kyon chunaree nahin rangate ?
bahut din beete .
khusaro nijaam ke bali bali jaie,
kyon daras nahin dete ?
bahut din beete .

Friday, 4 August 2017

सकल बन फूल रही सरसों।

No comments :

सकल बन फूल रही सरसों।
बन बिन फूल रही सरसों।
अम्बवा फूटे, टेसू फूले,
कोयल बोले डार-डार,
और गोरी करत सिंगार,
मलनियाँ गेंदवा ले आईं कर सों,
सकल बन फूल रही सरसों।
तरह तरह के फूल खिलाए,
ले गेंदवा हाथन में आए।
निजामुदीन के दरवज़्ज़े पर,
आवन कह गए आशिक रंग,
और बीत गए बरसों।
सकल बन फूल रही सरसों।

sakal ban phool rahee sarason.
ban bin phool rahee sarason.
ambava phoote, tesoo phoole,
koyal bole daar-daar,
aur goree karat singaar,
malaniyaan gendava le aaeen kar son,
sakal ban phool rahee sarason.
tarah tarah ke phool khilae,
le gendava haathan mein aae.
nijaamudeen ke daravazze par,
aavan kah gae aashik rang,
aur beet gae barason.
sakal ban phool rahee sarason.

Thursday, 20 July 2017

तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम,

No comments :
तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम,
तोरी सूरत के बलिहारी ।
सब सखियन में चुनर मेरी मैली,
देख हसें नर नारी, निजाम...
अबके बहार चुनर मोरी रंग दे,
पिया रखले लाज हमारी, निजाम....
सदका बाबा गंज शकर का,
रख ले लाज हमारी, निजाम...
कुतब, फरीद मिल आए बराती,
खुसरो राजदुलारी, निजाम...
कौउ सास कोउ ननद से झगड़े,
हमको आस तिहारी, निजाम,
तोरी सूरत के बलिहारी, निजाम...

toree soorat ke balihaaree, nijaam,
toree soorat ke balihaaree .
sab sakhiyan mein chunar meree mailee,
dekh hasen nar naaree, nijaam...
abake bahaar chunar moree rang de,
piya rakhale laaj hamaaree, nijaam....
sadaka baaba ganj shakar ka,
rakh le laaj hamaaree, nijaam...
kutab, phareed mil aae baraatee,
khusaro raajadulaaree, nijaam...
kauu saas kou nanad se jhagade,
hamako aas tihaaree, nijaam,
toree soorat ke balihaaree, nijaam...
{js=d.createElement(s);js.id=id;js.src=p+'://platform.twitter.com/widgets.js';fjs.parentNode.insertBefore(js,fjs);}}(document, 'script', 'twitter-wjs');