Monday, 3 December 2018

देवा पाहन तारीअले

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देवा पाहन तारीअले ॥
राम कहत जन कस न तरे ॥1॥रहाउ॥

तारीले गनिका बिनु रूप कुबिजा बिआधि अजामलु तारीअले ॥
चरन बधिक जन तेऊ मुकति भए ॥
हउ बलि बलि जिन राम कहे ॥1॥

दासी सुत जनु बिदरु सुदामा उग्रसैन कउ राज दीए ॥
जप हीन तप हीन कुल हीन क्रम हीन नामे के सुआमी तेऊ तरे ॥2॥1॥345॥

( पाहन=पत्थर, कस=क्यों, गनिका=वैश्या,
कुबिजा=कंस की गोली, ब्याधि=रोगी,विकारी पुरुष,
बधिक=शिकारी जिसने कृष्ण जी के पैर में तीर
मारा था, सुत=पुत्र,  तेऊ=
वह सभी)

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