Monday, 3 December 2018
मनु मेरो गजु जिहबा मेरी काती ॥
मनु मेरो गजु जिहबा मेरी काती ॥
मपि मपि काटउ जम की फासी ॥1॥
कहा करउ जाती कह करउ पाती ॥
राम को नामु जपउ दिन राती ॥1॥रहाउ॥
रांगनि रांगउ सीवनि सीवउ ॥
राम नाम बिनु घरीअ न जीवउ ॥2॥
भगति करउ हरि के गुन गावउ ॥
आठ पहर अपना खसमु धिआवउ ॥3॥
सुइने की सूई रुपे का धागा ॥
नामे का चितु हरि सउ लागा ॥4॥3॥
मपि मपि काटउ जम की फासी ॥1॥
कहा करउ जाती कह करउ पाती ॥
राम को नामु जपउ दिन राती ॥1॥रहाउ॥
रांगनि रांगउ सीवनि सीवउ ॥
राम नाम बिनु घरीअ न जीवउ ॥2॥
भगति करउ हरि के गुन गावउ ॥
आठ पहर अपना खसमु धिआवउ ॥3॥
सुइने की सूई रुपे का धागा ॥
नामे का चितु हरि सउ लागा ॥4॥3॥
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