Thursday, 2 August 2018
मेरा जिक्र
मेरी वीरान सी दुनिया मे नए रंग सजाने वाले
तेरी दुनिया मे कही मेरा जिक्र है के नही
मेरे हमराह मेहरबान बता दे मुझको
तेरे खयालो मे कोई मेरा बसर है के नहीं
तेरे संगे होने लगी ह फिर मे जवा
तुझमे जीने को कोई उम्र है के नहीं
अपनी चाहतो का इजहार बता कैसे करू
तुझमे चेहरे को पड़ने का हुनर है नही
अपनी हसरते तुझपर मे बयान कैसे करू
ना मालूम के इन हसरतो मे सब्र है क्यों नहीं
हज़ारो ख्वाब आँखों के तबाह कैसे करू
तू बता तुझमे मुझ सा सब्र है के नहीं
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