Tuesday, 20 August 2019
जिंदा है तेरी यादें तो जिंदा हु मैं
जिंदा है तेरी यादें तो जिंदा हु मैं
वार्ना सच कहु अपने जिंदा होने पे बहुत शर्मिंदा हु मैं
जब छू सकता था तुमको तो तुम पर्दानशीं बन बैठे
बेबसी का फशार इतना है
अब जब छू नही सकता तो तुम ही जमी आसमान बन बैठे
मुझपर तेरा खुमार इतना है
हवाओ मैं घुल गई तुम तो सांसे ले पाता हूं मैं
वार्ना घुटन से परेशान पुलिंदा हु मैं
तू जब इंसान थी तो कितनी दूर थी हर बात के लिए कितनी मजबूर थी
अब से तू फसाना बन मशहूर हुई क्योंकि इंसान नही अब तू जन्नत की हूर थी
तेरा जिक्र आता है मेरी जुबा से बार बार तो खैर खा मेरे बहुत है लोग
वार्ना तो कोई आम सा बंदा हु मैं
सोचा था के किसी सुबह तुम चाय की प्याली ले कर दिखोगी मुझे
तुम आती तो मगर चाय के टेबल पर बाते बेहिसाब लिए
तुम जन्नत में जा बसी हो मेरी रूह से आ मिली हो खुदा जाने
खुशनसीबी मेरी के तुझमें जिंदा हु मैं
याद करो कितना मुश्किल होता था तुमको एक नजर देखना
अब तो बेधड़क चली आती हो कभी ख्वाबो मैं, यादों में और कभी बातों में
बेहतरीन है ये अहसास के तेरा न होकर भी हर जगह होना
लगता है मुझको भी के कोई खास चुनिंदा हु मैं
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