Monday, 30 December 2019
मिन्नत करते जिंदगी बिता लूंगा minnat karte jindagi bitaa lunga
वो रूठ जाए तो मना लूंगा
वो नखरे दिखाए तो उठा लूंगा
बस इसी तरह मिन्नत करते जिंदगी बिता लूंगा
वो भूल जाये मुझको तो याद दिला दूंगा
वो नजरे चुराए तो नजरो के सामने ही रहूंगा
वो मेरे न हुए तो खुदको उनके नाम लिखा दूंगा
बस इसी तरह मिन्नत करते जिंदगी बिता लूंगा
वो बेवफाई भी करे तो भी अकेले ही वफ़ा निभा दूंगा
देना पड़ा गर उनको हिसाब तो सब बही खाते मिटा दूंगा
वो चाहत नही इबादत है मेरी ,मैं जिद्द को जुनून बना दूंगा
बस इसी तरह मिन्नत करते जिंदगी बिता लूंगा
गलती से रोये गर कभी वो तो मैं खुद को मोम सा पिघला दूंगा
हँसना चाहेंगे गर कभी वो तो खुद को जोकर बना दूंगा
दिल्लगी करे या दिलजोई , मै लम्हा उनके कदमो मैं रहूंगा
बस इसी तरह मिन्नत करते जिंदगी बिता लूंगा
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