Tuesday, 18 June 2019
मैं तुमको नजर ना आयुंगी
इन आँखों में सो जयुंगी
मैं बातो में रह जयुंगी
कुछ चंचल खट्टी मीठी सी
मै यादो में खो जयुंगी
कल श्याद मैं तुमको नजर ना आयुंगी
इक दिन तुमको खलेगी
ढूँढोगे हर लम्हा पर न मिलेगी
मेरे रंग में फिजा ये रंगेगी
मैं नहीं बस तस्वीर मेरी रहेगी
मै बादलो में चेहरा बनकर उभर आयुंगी
कल श्याद तुमको नजर न आयुंगी
सांसे तुम्हारी कुछ मद्धम होंगी
दिए की लो भी कुछ कम होंगी
उजली सुबह में ढलती शाम मिलेगी
रंगो में भी पहले सी वो जान न होगी
फिर से छत पे दुपट्टा लहराने मैं न आयुंगी
कल श्याद तुमको नजर न आयुंगी
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