Wednesday, 22 January 2020

आहे-फ़लक-फ़ुग़न तेरे ग़म से कहाँ नही

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आहे-फ़लक-फ़ुग़न तेरे ग़म से कहाँ नहीं
जो फ़ितनाख़ेज़ अब है ज़मीं आसमाँ नहीं

कहना पड़ा मुझे पये-इल्ज़ाम-पंद-गो
वह माजरा जो लायक़े-शरह-ओ-बयाँ नहीं

डरता हूँ आसमान से बिजली न गिर पड़े
सैयाद की निगाह सू-ए-अशियाँ नहीं

बातें तेरी वह होश-रुबा हैं कि क्या कहूँ
जो कोई मेरा राज़दाँ है मेरा राज़दाँ नहीं

बे-सरफ़ा-जाँकनी का मेरा कुछ तो हो हुसूल
मेहनत किसी की आज तलक रायगाँ नहीं

करते वफ़ा उम्मीदे-वफ़ा पर तमाम उम्र
पर क्या करें कि उसको सरे-इम्तिहाँ नहीं

मैं अपनी चश्मे-शौक़ को इल्ज़ाम ख़ाक दूँ
तेरी निगाह शर्म से क्या कुछ अयाँ नहीं

इतने-सुबुक नज़र में है अवज़ाअ-रोज़ग़ार
दुनिया की हसरतें मेरे दिल पर गराँ नहीं


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