मस्ती ब-ज़ौक़-ए-ग़फ़लत-ए-साकी हलाक है मौज-ए-शराब यक-मिज़ा-ए-ख़्वाब-नाक है जुज़ ज़ख्म-ए-तेग-ए-नाज़ नहीं दिल में आरज़ू जेब-ए-ख़याल भी तिरे हाथों से चाक है जोश-ए-जुनूँ से कुछ नज़र आता नहीं ‘असद’ सहरा हमारी आँख में यक-मुश्त-ए-ख़ाक है
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