Wednesday, 22 January 2020

मैं एहवाल-ए-दिल मर गया कहते कहते

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मैं एहवाल-ए-दिल मर गया कहते कहते
थके तुम न "बस, बस, सुना!" कहते कहते


मुझे चुप लगी मुद्द'आ कहते कहते,
रुके हैं वो क्या जाने क्या कहते कहते

ज़बाँ गुंग है इश्क़ में गोश कर है,
बुरा सुनते-सुनते भला कहते कहते

शब-ए-हिज्र  में क्या हजूम-ए-बला  है,
ज़बाँ थक गई मरहबा  कहते कहते

गिला हर्ज़ा-गर्दी का बेजा न था कुछ,
वो क्यूँ मुस्कुराये बजा कहते कहते

सद  अफ़सोस जाती रही वस्ल की शब ,
"ज़रा ठहर ऐ बेवफ़ा" कहते कहते


चले तुम कहाँ मैंने तो दम लिया था,
फ़साना दिल-ए-ज़ार का कहते कहते

सितम  हाय! गर्दूँ  मुफ़स्सिल  न पूछो,
कि सर फिर गया माजरा कहते कहते

नहीं या सनम 'मोमिन' अब कुफ़्र से कुछ,
कि ख़ू  हो गई है सदा कहते कहते


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