Sunday, 9 February 2020
अमवा के डाढ़ कोइलिया मत करह किलोल ॥1॥
अमवा के डाढ़ कोइलिया मत करह किलोल ॥1॥
मोर से उमठा आम गछिया
हिय बीचे फोड़े सोर।
पात रूप सजल नयनमा
नीर बिरह अथोर।
ओसवा से भिंजल पतिया अनचित्ते मत झोल ॥2॥
पुनियां के उगत इंजोरिया
चहुं दिस टहपार।
अमवां में लगतइ मंजरिया
मँहँ मँहँ सुकुमार।
अबहीं तो रयनि अंधरिया सुनअ रसे रसे बोल ॥3॥
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