Sunday, 2 February 2020

ऐ अहल-ए-वफ़ा ख़ाक बने काम तुम्हारा

No comments :

ऐ अहल-ए-वफ़ा ख़ाक बने काम तुम्हारा
आग़ाज बता देता है अंजाम तुम्हारा

जाते हो कहाँ इश्क़ के बेदाद-कशो तुम
उस अंजुमन-ए-नाज़ में क्या काम तुम्हारा

ऐ दीदा ओ दिल कुछ तो करो ज़ब्त ओ तहम्मुल
लबरेज़ मय-ए-शौक़ से है जाम तुम्हारा

ऐ काश मिरे क़त्ल ही का मुज़्दा वो होता
आता किसी सूरत से तो पैग़ाम तुम्हारा

‘वहशत’ हो मुबारक तुम्हें बद-मस्ती ओ रिंदी
जुज़ इश्क़-ए-बुताँ और है क्या काम तुम्हारा


No comments :

Post a Comment

{js=d.createElement(s);js.id=id;js.src=p+'://platform.twitter.com/widgets.js';fjs.parentNode.insertBefore(js,fjs);}}(document, 'script', 'twitter-wjs');