Thursday, 20 February 2020

इश्क़े-बुताँ का ले के सहारा कभी-कभी

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इश्क़े-बुताँ का ले के सहारा कभी-कभी
अपने ख़ुदा को हमने पुकारा कभी-कभी

आसूदा ख़ातिरी ही नहीं मतमए-वफ़ा
ग़म भी किया है हमने गवारा कभी-कभी

इस इन्तहाए-तर्के-मुहब्बत के बावजूद
हमने लिया है नाम तुम्हारा कभी-कभी

बहके तो मैक़दे में नमाज़ों पे आ गए
यूँ आक़बत को हमने सँवारा कभी-कभी


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