मगध जननी (तर्ज झूमाड़) सुन्दर बसुधा मगध जननी (मोर) जलमधरनी जहां सुख देहे प्रकृति दिवस रजनी ॥1॥ उत्तम धरनी मनोहरनी बनी माधवनी से हो लाजे लजाय लखे अवनी ॥2॥
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