आह हम हैं और शिकस्ता-पाइयाँ अब कहाँ वो बादिया-पैमाइयाँ जोश-ए-तूफाँ है न मौंजों का ख़रोश अब लिए है गोद में गहराइयाँ खेलते थे ज़िंदगी ओ मौत से वो शबाब और आह वो कजराइयाँ हम हैं सन्नाटा है और महवियतें रात है और रूह की गहराइयाँ
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