Thursday, 13 February 2020
बात कुछ दिल की तो क्या बन पायेगी
बात कुछ दिल की तो क्या बन पायेगी
हां हमारी जान पर बन जायेगी
मौत को आना है इक दिन आयेगी
जान को जाना है आख़िर जायेगी
सो तो जायेगा अजल की गोद में
आंख तो बीमार की लग जायेगी
आप रो रो के मनाएं ग़ैर को
ये क़ियामत किस से देखी जायेगी
और कोई ख़िदमत ए नासिह बता
मयकशी हम से न छोड़ी जायेगी
हिचकियों में कट गया दिन ऐ 'वफ़ा'
सिसकियों में रात भी कट जायेगी।
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
No comments :
Post a Comment