Wednesday, 19 February 2020

आ ही गया वो मुझ को लहद में उतारने

No comments :

आ ही गया वो मुझ को लहद में उतारने
ग़फ़लत ज़रा न की मिरे ग़फ़लत-शेआर ने

ओ बे-नसीब दिन के तसव्वुर ये ख़ुश न हो
चोला बदल लिया है शब-ए-इंतिज़ार ने

अब तक असीर-ए-दाम-ए-फ़रेब-ए-हयात हूँ
मुझ को भुला दिया मिरे परवरदिगार ने

नौहा-गारों को भी है गला बैठने की फ़िक्र
जाता हूँ आप अपनी अजल को पुकारने

देखा न कारोबार-ए-मोहब्बत कभी ‘हफ़ीज’
फ़ुर्सत का वक़्त ही न दिया कारोबार ने


No comments :

Post a Comment

{js=d.createElement(s);js.id=id;js.src=p+'://platform.twitter.com/widgets.js';fjs.parentNode.insertBefore(js,fjs);}}(document, 'script', 'twitter-wjs');