Wednesday, 12 February 2020
मैं जल्द आऊंगा ये कहते रहना
बहुत दर्द में हु
तुम आओ तो थोड़ा मरहम लेते आना
दीवानी सी हुए फिरती हु तुम आओ तो कोई नया गम लेते आना
बस इतना कर्म करना के थोड़ा सा भ्रम रखना
तुम आओ या ना आओ ,पर मैं जल्द आऊंगा ये कहते रहना
सो ख्वाब पुराने, धूल से मैले हुए तकिये के नीचे रखे है
अंधेरे बंद कमरे में सो अरमान सुलगते से पड़े है
एक बंद खिड़की है किनारो से कुछ टूटी हुई
तुम आओ तो खिड़की के किनारो पे थोड़ी सूरज की रोशनी लगाते आना
बस जल्द आऊंगा मै ये कहते रहना
तेरे आने की उम्मीद है के मुझे नाउम्मीद कभी होने नही देती
सांसो के लय पे तेरा नाम गुनगुनाती धड़कन , धड़कने खोने नही देती
तेरी जुदाई हँसने नही देती तो उम्मीद रोने नही देती
उस पर ये खुली आँखों के ख्वाब नींद आने नही देते
बस जल्द आऊंगा मै ये कहते रहना
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