Thursday, 23 January 2020
कोई मुँह चूम लेगा इस नहीं पर
कोई मुँह चूम लेगा इस नहीं पर
शिकन रह जाएगी यूँही जबीं पर
उड़ाए फिरती है उन को जवानी
क़दम पड़ता नहीं उन का ज़मीं पर
धरी रह जाएगी यूँही शब-ए-वस्ल
नहीं लब पर शिकन उन की ज़बीं पर
मुझे है ख़ून का दावा मुझे है
उन्हीं पर दावर-ए-महशर उन्हीं पर
‘रियाज़’ अच्छे मुसलमाँ आप भी हैं
कि दिल आया भी तो काफ़िर हसीं पर
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