Saturday, 25 January 2020

चमकीले तारे

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क्या चमकीले तारे हैं,
बड़े अनूठे, प्यारे हैं!
आँखों में बस जाते हैं,
जी को बहुत लुभाते हैं!
जगमग-जगमग करते हैं,
हँस-हँस मन को हरते हैं।
नए जड़ाऊ गहने हैं,
जिन्हें रात ने पहने हैं!
कितने रंग बदलते हैं,
बड़े दिए-से बलते हैं!
घर के किसी उजाले हैं,
जोत जगाने वाले हैं!
हीरे बड़े फबीले हैं,
छवि से भरे छबीले हैं!
कभी टूट ये पड़ते हैं
फूलों-जैसे झड़ते हैं!
चिनगी-सी छिटकाते हैं,
छोड़ फुलझड़ी जाते हैं!


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