Sunday, 18 November 2018
आजाद परिंदे
मोहब्बत भी अजीबो गरीब कारनामे करती है
जिंदा चलते फिरते इंसानों को पंख लग देती है
फिर कोई इंसान फरिश्ता नजर आता है तो कोई लड़कीं परी
ये पंख देते है खूब हौसला के हां
हम लड़ेंगे जमाने के खिलाफ
हम तोर देंगे हर रस्मे दीन दुनिया की
ओर बसायेंगे खुद का जहाँ
मगर भूल जाते है ये लोग के ये पंख तो महज़ एक ख्याली ख्याब है
तो उड़िये जब तक उड़िये
उड़ते उड़ते ही पंख उड़ जाएंगे
ओर आसमान में उड़ने वाले आज़ाद परिंदे
धरती पे जिंदा न आएंगे
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