Monday, 12 November 2018

भोर का दिया

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इक दिया जो रात भर जलता रहा,  भोर मे बुझा दिया गया ।
मतलब के संसार ने बुझते दिए के लो को हवा से दबा दिया गया।

जाने किसके इन्तजार मे ये रात भर जलता रहा
कतरा कतरा बून्द तैल से रोशन से पूरा घर करता रहा।

शाम हुई तो सब ने दिया जलाने का इशारा किया
ढूंढ के लाये दिए को इक नयी बाती से सजा दिया

दियासलाई की एक तिनके भर चिंगारी ने लो को रोशन कर दिया
फिर से शुरू हुआ साँझ से भोर तक रौशनी का सिलसिला


ज्यो ही रात बढ़ने लगी, सब की आँखों मई नींद सी चढ़ने लगी
मुझ जैसी एक मुरझाये सी औरत ने मेरी लो को धीमा कर दिया

मगर मे रात भर जलता रहा जैसे बिस्तर पर पड़ी वो औरत
वो भी भोर के इन्तजार मे थी और मे भी उसी इंतजार मे सुलगता रहा

उसके जीवन की भोर शायद कभी आएगी नहीं
हां , मगर गर लो बुझ गई तो
शायद वो भी सुलगना छोर देगी

समझ नहीं आता के ये कैसी भोर है
के जिसके इंतजार मे हम दोनों जलते है
मगर भोर होते ही रौशनी दिखने से पहले ही
दोनों की लो बुझा दी जातीहै


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