Sunday, 6 January 2019
करेंगे क़स्द हम जिस दम तुम्हारे घर में आवेंगे, karenge kasd hum is dam tumhare ghar aavenge
करेंगे क़स्द हम जिस दम तुम्हारे घर में आवेंगे
जो होगी उम्र भर की राह तो दम भर में आवेंगे.
अगर हाथों से उस शीरीं-अदा के ज़बह होंगे हम
तो शरबत के से घूँट आब-ए-दम-ए-ख़ंजर में आवेंगे.
यही गर जोश-ए-गिर्या है तो बह कर साथ अश्कों के
हज़ारों पारा-ए-दिल मेरे चश्म-ए-तर में आवेंगे.
गर इस क़ैद-ए-बला से अब की छूटेंगे तो फिर हरगिज़
न हम दाम-ए-फ़रेब-ए-शोख़-ए-ग़ारत-गर में आवेंगे.
न जाते गरचे मर जाते जो हम मालूम कर जाते
के इतना तंग जा कर कूचा-ए-दिल-बर में आवेंगे.
गिरेबाँ-चाक लाखों हाथ से उस मेहर-ए-तलअत के
ब-रंग-ए-सुबह-ए-महशर अरसा-ए-महशर में आवेंगे.
जो सर-गरदानी अपनी तेरे दीवाने दिखाएँगे
तो फिर क्या क्या बगोले दश्त के चक्कर में आवेंगे.
‘ज़फ़र’ अपना करिश्मा गर दिखाया चश्म-ए-साक़ी ने
तमाशे जाम-ए-जम के सब नज़र साग़र में आवेंगे.
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