Friday, 4 January 2019

तो मानु के उधार खत्म हुआ, to maanu ke udhar khatam hua

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मुझे शोक नहीं उसको कठघरे
में खड़े करने का।
मगर क्या करू, बात असूल की है
ब्याज तो सब माफ़ किया ,
बात सिर्फ मूल की है

उसपर बेवजह बोझ नहीं डालना चाहती मै
बस अपना पुराना उधार ही वापिस चाहती मै

गजब देखो के उसे कर्जदार होकर भी याद नहीं
के कितना उधार बाकी है
और मेरी दरियादिली देखो के उधार  माफ़ करने का हौसला मुझमें बाकी है

पुराने गले खातो को अब तक संभाल के बैठी हु
क्योंकि इन खातो में उसका नाम बाकी है
पीले पड़ चुके पन्नों पर , धुंधली पड़ी श्याही से भी दिख जाता है के उधार बाकी है

मुझे साहूकारी नहीं पसंद न बंगले की ख्वाइश है
बस वो ही पुराने नोट चाहिए वापिस
जो उधारी के वक्त दिए थे उसे
वो ही पुराने समय , मौसम और फिजा मै
वो सब उधार लौटा दे मेरा

वो ही पुराना चेहरा हो, मगर झुर्रियां के बिना हो
तो मानु के उधार चुकता हुआ
घडी की सुईया चलते चलते जहा रुकी वाही से फिर से चले तो उधार खत्म हुआ

बस वो ही पुराने नोट, वो ही पुराने सिक्के
मुझे वो वापिस लौटा दे तो मानू के उधार खत्म हुआ
कितने साल उसकी बेवफा मोहब्बत ने खत्म हुए
वो साल उसी ताजगी में लौटा दे
तो मानु के उधार पूरा खत्म हुआ

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