Sunday, 6 January 2019
वाँ इरादा आज उस क़ातिल के दिल में और है vaa iraada aaj us kaatil
वाँ इरादा आज उस क़ातिल के दिल में और है
और यहाँ कुछ आरज़ू बिस्मिल के दिल में और है.
वस्ल की ठहरावे ज़ालिम तो किसी सूरत से आज
वर्ना ठहरी कुछ तेरे माइल के दिल में और है.
है हिलाल ओ बद्र में इक नूर पर जो रोशनी
दिल में नाक़िस के है वो कामिल के दिल में और है.
पहले तो मिलता है दिल-दारी से क्या क्या दिल-रुबा
बाँधता मंसूबे फिर वो मिल के दिल में और है.
है मुझे बाद-अज़-सवाल-ए-बोसा ख़्वाहिश वस्ल की
ये तमन्ना एक इस साइल के दिल में और है.
गो वो महफ़िल में न बोला पा गए चितवन से हम
आज कुछ उस रौनक़-ए-महफ़िल के दिल में और है.
यूँ तो है वो ही दिल-ए-आलम के दिल में ऐ ‘ज़फ़र’
उस का आलम मर्द-ए-साहब दिल के दिल में और है.
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