Sunday, 6 January 2019
सब रंग में उस गुल की मेरे शान है मौजूद, sab rang mei us gul ki
सब रंग में उस गुल की मेरे शान है मौजूद
ग़ाफ़िल तू ज़रा देख वो हर आन है मौजूद.
हर तार का दामन के मेरे कर के तबर्रुक
सर-बस्ता हर इक ख़ार-ए-बयाबान है मौजूद.
उर्यानी-ए-तन है ये ब-अज़-ख़िलअत-ए-शाही
हम को ये तेरे इश्क़ में सामान है मौजूद.
किस तरह लगावे कोई दामाँ को तेरे हाथ
होने को तू अब दस्त-ओ-गिरेबान है मौजूद.
लेता ही रहा रात तेरे रुख़ की बलाएँ
तू पूछ ले ये जुल्फ़-ए-परेशान है मौजूद.
तुम चश्म-ए-हक़ीक़त से अगर आप को देखो
आईना-ए-हक़ में दिल-ए-इंसान है मौजूद.
कहता है ‘ज़फ़र’ हैं ये सुख़न आगे सभों के
जो कोई यहाँ साहब-ए-इरफ़ान है मौजूद.
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