बाजी खर होते नहीं, चाहे खाय कपूर । यम नजाद बदलें नहीं, है ये बात जरूर ।। है ये बात जरूर, तुखम तासीर सही है । समझदार ने बात समझ कर ठीक कही है ।। गंगादास खर पशु रहें कूड़ी पर राजी । ताज धरो चाहे शीश, गधा होता ना बाजी ।।
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