बाजी तेरी फ़िर पड़ी, होगी तेरी जीत । ये फँसे हैं भोग से, पड़े करो परतीत ।। पड़े करो परतीत दाव पड़ गए पौबारे । चीढे हैं जुग चार सर फ़िर लई हैं सारे ।। गंगादास ये खेल खेलते हैं अग्गाजी । आती है अग्गाज आज जीतेगा बाजी ।।
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