Thursday, 3 January 2019
शिकवए-ग़म तेरे हुज़ूर किया shikva ae gam tera huzoor kiya
शिकवए-ग़म तेरे हुज़ूर किया
हमने बेशक बड़ा क़ुसूर किया
दर्दे-दिल को तेरी तमन्ना ने
ख़ूब सरमायाए-सरूर किया
नाज़े-ख़ूबाँ ने आ़शिक़ों के सिवा
आ़रिफ़ों[4] को भी नासबूर[5] किया
यह भी इक छेड़ है कि क़ुदरत ने
तुमको ख़ुद-बीं[6] हमें ग़यूर[7] किया
नूरे-अर्ज़ो-समा[8] को नाज़ है यह
कि तेरी शक्ल में ज़हूर [9] किया
आपने क्या किया कि 'हसरत' से-
न मिले, हुस्न का ग़रूर किया!
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