Wednesday, 2 January 2019
याँ किये ग़म है जो गिर्या ने असर छोड़ दिया, yaa kiye gam hai jo
याँ किये ग़म है जो गिर्या ने असर छोड़ दिया
हम ने तो शग़्ल ही दे दीद-ए-तर छोड़ दिया
दिल-ए-बे-ताब का कुछ ध्यान न आया उस दम
हाए क्यूँ हमने उसे वक़्त-ए-सहर छोड़ दिया
क्या सताए नहीं जाते हैं वलेकिन चुप हैं
शिकवा करना तेरा ए रश्क-ए-क़मर छोड़ दिया
दम-ए-रूख़्सत कभी कुछ दिल की तमन्ना न कही
दामन-ए-यार उधर पकड़ा इधर छोड़ दिया
दिल की उल्फ़त न सही प्यारे की बातें न सही
देखना भी तो इधर एक नज़र छोड़ दिया
ग़ैर के धोखे में ख़त ले के मेरा क़ासिद से
पढ़ने को पढ़ तो लिया नाम मगर छोड़ दिया
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