Wednesday, 26 April 2017
मै कोई काज़ी नहीं
मै कोई काज़ी नहीं
दिल भी जिद पर अड़ा है
मौला भी राजी नहीं
अब किसको मनाऊ , किसको समझाऊ
मै कोई काज़ी नहीं
दिल कहता है का काफिर हो जाऊ
छोड़ दू तेरी बंदगी और किसी और को हाजिर हो जाऊ
खुदा कहता है के तेरी मंजिल मै हु
और दिल कहता है के मंजिल नहीं बस उसका रास्ता चाहिए
अब किसको मनाऊ क्सिको समझाऊ
मै कोई काज़ी नहीं
दिल कहता है के खुदा को किसने देखा है
वो जो सामने है वो कौन सा खुदा से कम है
मै जन्नत की जुफ्तज़ु क्यों करू
खुदा तो खुद ही ही धरती पे बैठा है
अब किसको मनाऊ क्सिको समझाऊ
मै कोई काज़ी नहीं
Subscribe to:
Post Comments
(
Atom
)
No comments :
Post a Comment