Wednesday, 26 April 2017

बचपन की बारिश

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बचपन की बारिश


आज फिर से बारिशो का पानी आया है
बचपन की यादे फिर से महका के लाया है 
फिर से पूछे दिल आज ये सवाल 
के कहा से ये कौन लाता है पानी 

 वो छम छम कर के बरसती थी बुँदे
बूंदो को छूने  तरसता था ये दिल 
गरजती बिजली से कब डरता था ये दिल  
हर पल मैं मै थी नन्ही सी उलझन 
के कहा से ये कौन लाता है पानी 

बारिश मै हर दिन भीगे से कपडे
कॉपी किताबो के गीले से पन्ने 
कटोरी मै हर बार भरना ये पानी 
स्वाद मै था शर्बतों से भारी
के कौन कहा से लाता है पानी



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