Tuesday, 4 December 2018

अल्ला देवे अल्ला दिलावे अल्ला दारु अल्ला खलावे।

No comments :
अल्ला देवे अल्ला दिलावे अल्ला दारु अल्ला खलावे। 
अल्ला बगर नही कोये अल्ला करे सो हि होये ॥१॥

मर्द होये वो खडा फीर नामर्दकुं नहीं धीर ।
आपने दिलकुं करना खुसी तीन दामकी क्या खुमासी ॥ध्रु.॥

सब रसोंका किया मार । भजनगोली एक हि सार ।
इमान तो सब ही सखा । थोडी तो भी लेकर ज्या ॥२॥

जिन्हो पास नीत सोये । वो हि बसकर तिरोवे । 
सांतो पांचो मार चलावे । उतार सो पीछे खावे ॥३॥

सब ज्वानी निकल जावे। पीछे गधडा मटी खावे ।
गांवढाळ सो क्या लेवे । हगवनि भरी नहि धोवे ॥४॥

मेरी दारु जिन्हें खाया । दिदार दरगां सो हि पाया । 
तल्हे मुंढी घाल जावे । बिगारी सोवे क्या लेवे ॥५॥

बजारका बुझे भाव। वो हि पुसता आवे ठाव ।
फुकट बाटु कहे तुका । लेवे सोहि लें हिसखा ॥६॥

No comments :

Post a Comment

{js=d.createElement(s);js.id=id;js.src=p+'://platform.twitter.com/widgets.js';fjs.parentNode.insertBefore(js,fjs);}}(document, 'script', 'twitter-wjs');