Tuesday, 4 December 2018

क्या गाऊं कोई सुननवाला । देखें तों सब जग ही भुला ॥

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क्या गाऊं कोई सुननवाला । देखें तों सब जग ही भुला ॥१॥

खेलों आपणे राम इसातें । जैसी वैसी करहों मात ॥ध्रु.॥

काहांसे ल्यावों माधर वाणी । रीझे ऐसी लोक बिराणी ॥२॥

गिरिधर लाल तो भावहि भुका । राग कला नहीं जानत तुका ॥३॥

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