Monday, 3 December 2018

दोहे शेख फरीद के Dohe Sheikh Farid 201-210

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बुढा थिया सेख फ़रीदा कम्बन लगे टाल ॥
टिंडड़ियां जल लाणियां तुरन लग्गी माल्ह ॥201॥


भन्नी घड़ी सुवन्नवी टुटी नागर लज्ज ॥
अजराईल फरेसता कै घरि नाठी अज्ज ॥
घिन्नन आया जिन्द कू इका करेसी पज ॥202॥


मुहंमद चले दसवारी अव्वल पंचा बन्द ॥
सांप चोर बाघ भेड़िया चारो रसते बन्द ॥203॥


मंझि मका मंझि मैं तियां मंझे ही फिरियाद ॥
नयाव मंझाऊ निकले मंझे पावनिज दादि ॥204॥


मुला अके तां लोड़ि मुकदमी अके तां अलहु लोड़ि ॥
डू बेड़ी ना लत धरि मत वंञें वखर बोड़ि ॥205॥


मूसा नठा मौत तों ढंडे काए गली ।
चारे कूंटां ढूंडियां अग्गे मौत खली ॥206॥


यह तन रता वेखि करि तिलयुर ठुंग न मार ॥
जो रते रब आपने तिन तनि रतु न भालि ॥207॥


लख करोड़ी खटि के बन्दा जायी नि नंगु ॥
फ़रीदा जिन्दुड़ी न छडदा अजराईलु मलंग ॥208॥


वैयी वगि वुही वालि पवी हू न थीऐ ॥
सकुर करि सम तुधु उधार थीवै ॥209॥


फ़रीदा जां जां जीवे दुनी ते तां तां फिरो अलख ॥
दरगह सचा तां थीवे जां खफन मूल न रख ॥210॥


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