Monday, 3 December 2018

शेख फरीद के दोहे -4

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फरीदा महल निसखण रहि गए वासा आइआ तलि ॥
गोरां से निमाणीआ बहसनि रूहां मलि ॥
आखीं सेखा बंदगी चलणु अजु कि कलि ॥97॥


फरीदा मउतै दा बंना एवै दिसै जिउ दरीआवै ढाहा ॥
अगै दोजकु तपिआ सुणीऐ हूल पवै काहाहा ॥
इकना नो सभ सोझी आई इकि फिरदे वेपरवाहा ॥
अमल जि कीतिआ दुनी विचि से दरगह ओगाहा ॥98॥


फरीदा दरीआवै कंन्है बगुला बैठा केल करे ॥
केल करेदे हंझ नो अचिंते बाज पए ॥
बाज पए तिसु रब दे केलां विसरीआं ॥
जो मनि चिति न चेते सनि सो गाली रब कीआं ॥99॥


साढे त्रै मण देहुरी चलै पाणी अंनि ॥
आइओ बंदा दुनी विचि वति आसूणी बंन्हि ॥
मलकल मउत जां आवसी सभ दरवाजे भंनि ॥
तिन्हा पिआरिआ भाईआं अगै दिता बंन्हि ॥
वेखहु बंदा चलिआ चहु जणिआ दै कंन्हि ॥
फरीदा अमल जि कीते दुनी विचि दरगह आए कमि ॥100॥


फरीदा हउ बलिहारी तिन्ह पंखीआ जंगलि जिंन्हा वासु ॥
ककरु चुगनि थलि वसनि रब न छोडनि पासु ॥101॥


फरीदा रुति फिरी वणु क्मबिआ पत झड़े झड़ि पाहि ॥
चारे कुंडा ढूंढीआं रहणु किथाऊ नाहि ॥102॥


फरीदा पाड़ि पटोला धज करी क्मबलड़ी पहिरेउ ॥
जिन्ही वेसी सहु मिलै सेई वेस करेउ ॥103॥


काइ पटोला पाड़ती क्मबलड़ी पहिरेइ ॥
नानक घर ही बैठिआ सहु मिलै जे नीअति रासि करेइ ॥104॥


फरीदा गरबु जिन्हा वडिआईआ धनि जोबनि आगाह ॥
खाली चले धणी सिउ टिबे जिउ मीहाहु ॥105॥


फरीदा तिना मुख डरावणे जिना विसारिओनु नाउ ॥
ऐथै दुख घणेरिआ अगै ठउर न ठाउ ॥106॥


फरीदा पिछल राति न जागिओहि जीवदड़ो मुइओहि ॥
जे तै रबु विसारिआ त रबि न विसरिओहि ॥107॥


फरीदा कंतु रंगावला वडा वेमुहताजु ॥
अलह सेती रतिआ एहु सचावां साजु ॥108॥


फरीदा दुखु सुखु इकु करि दिल ते लाहि विकारु ॥
अलह भावै सो भला तां लभी दरबारु ॥109॥


फरीदा दुनी वजाई वजदी तूं भी वजहि नालि ॥
सोई जीउ न वजदा जिसु अलहु करदा सार ॥110॥


फरीदा दिलु रता इसु दुनी सिउ दुनी न कितै कमि ॥
मिसल फकीरां गाखड़ी सु पाईऐ पूर करमि ॥111॥


पहिलै पहरै फुलड़ा फलु भी पछा राति ॥
जो जागंन्हि लहंनि से साई कंनो दाति ॥112॥


दाती साहिब संदीआ किआ चलै तिसु नालि ॥
इकि जागंदे ना लहन्हि इकन्हा सुतिआ देइ उठालि ॥113॥


ढूढेदीए सुहाग कू तउ तनि काई कोर ॥
जिन्हा नाउ सुहागणी तिन्हा झाक न होर ॥114॥


सबर मंझ कमाण ए सबरु का नीहणो ॥
सबर संदा बाणु खालकु खता न करी ॥115॥


सबर अंदरि साबरी तनु एवै जालेन्हि ॥
होनि नजीकि खुदाइ दै भेतु न किसै देनि ॥116॥


सबरु एहु सुआउ जे तूं बंदा दिड़ु करहि ॥
वधि थीवहि दरीआउ टुटि न थीवहि वाहड़ा ॥117॥


फरीदा दरवेसी गाखड़ी चोपड़ी परीति ॥
इकनि किनै चालीऐ दरवेसावी रीति ॥118॥


तनु तपै तनूर जिउ बालणु हड बलंन्हि ॥
पैरी थकां सिरि जुलां जे मूं पिरी मिलंन्हि ॥119॥


तनु न तपाइ तनूर जिउ बालणु हड न बालि ॥
सिरि पैरी किआ फेड़िआ अंदरि पिरी निहालि ॥120।


हउ ढूढेदी सजणा सजणु मैडे नालि ॥
नानक अलखु न लखीऐ गुरमुखि देइ दिखालि ॥121॥


हंसा देखि तरंदिआ बगा आइआ चाउ ॥
डुबि मुए बग बपुड़े सिरु तलि उपरि पाउ ॥122॥


मै जाणिआ वड हंसु है तां मै कीता संगु ॥
जे जाणा बगु बपुड़ा जनमि न भेड़ी अंगु ॥123॥


किआ हंसु किआ बगुला जा कउ नदरि धरे ॥
जे तिसु भावै नानका कागहु हंसु करे ॥124॥


सरवर पंखी हेकड़ो फाहीवाल पचास ॥
इहु तनु लहरी गडु थिआ सचे तेरी आस ॥125॥


कवणु सु अखरु कवणु गुणु कवणु सु मणीआ मंतु ॥
कवणु सु वेसो हउ करी जितु वसि आवै कंतु ॥126॥


निवणु सु अखरु खवणु गुणु जिहबा मणीआ मंतु ॥
ए त्रै भैणे वेस करि तां वसि आवी कंतु ॥127॥


मति होदी होइ इआणा ॥
ताण होदे होइ निताणा ॥
अणहोदे आपु वंडाए ॥
को ऐसा भगतु सदाए ॥128॥


इकु फिका न गालाइ सभना मै सचा धणी ॥
हिआउ न कैही ठाहि माणक सभ अमोलवे ॥129॥


सभना मन माणिक ठाहणु मूलि मचांगवा ॥
जे तउ पिरीआ दी सिक हिआउ न ठाहे कही दा ॥130॥

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