Monday, 3 December 2018
शेख फरीद के दोहे -2
1
साहुरै ढोई ना लहै पेईऐ नाही थाउ ॥
पिरु वातड़ी न पुछई धन सोहागणि नाउ ॥31॥
पिरु वातड़ी न पुछई धन सोहागणि नाउ ॥31॥
(साहुरै=ससुराल घर,परलोक में, ढोई=आसरा,
पेईऐ=मायके घर,इस लोक में, पिरु=खसम-प्रभु,
वातड़ी=थोड़ी सी बात, धन=स्त्री)
पेईऐ=मायके घर,इस लोक में, पिरु=खसम-प्रभु,
वातड़ी=थोड़ी सी बात, धन=स्त्री)
2
साहुरै पेईऐ कंत की कंतु अगमु अथाहु ॥
नानक सो सोहागणी जु भावै बेपरवाह ॥32॥
नानक सो सोहागणी जु भावै बेपरवाह ॥32॥
(अगमु =पहुँच से परे, अथाहु=
गहरा, भावै=प्यारी लगती है)
गहरा, भावै=प्यारी लगती है)
3
नाती धोती स्मबही सुती आइ नचिंदु ॥
फरीदा रही सु बेड़ी हिंङु दी गई कथूरी गंधु ॥33॥
फरीदा रही सु बेड़ी हिंङु दी गई कथूरी गंधु ॥33॥
(सम्बही=सजी हुई, नचिन्दु=बे-फ़िक्र, बेड़ी=
लिबड़ी हुई, कथूरी=कस्तूरी, गंधु=खुशबू)
लिबड़ी हुई, कथूरी=कस्तूरी, गंधु=खुशबू)
4
जोबन जांदे ना डरां जे सह प्रीति न जाइ ॥
फरीदा कितीं जोबन प्रीति बिनु सुकि गए कुमलाइ ॥34॥
फरीदा कितीं जोबन प्रीति बिनु सुकि गए कुमलाइ ॥34॥
(सह प्रीति=खसम का प्यार, कितीं=कितने ही)
5
फरीदा चिंत खटोला वाणु दुखु बिरहि विछावण लेफु ॥
एहु हमारा जीवणा तू साहिब सचे वेखु ॥35॥
एहु हमारा जीवणा तू साहिब सचे वेखु ॥35॥
(चिंत=चिंता, खटोला=छोटी खटिया, बिरहि=
विछोड़े में, विछावण=तलाई)
विछोड़े में, विछावण=तलाई)
6
बिरहा बिरहा आखीऐ बिरहा तू सुलतानु ॥
फरीदा जितु तनि बिरहु न ऊपजै सो तनु जाणु मसानु ॥36॥
फरीदा जितु तनि बिरहु न ऊपजै सो तनु जाणु मसानु ॥36॥
(बिरहा=जुदाई, सुलतानु=राजा, जितु तनि=जिस तन में,
बिरहु=जुदाई, मसानु=मुर्दे जलाने की जगह)
बिरहु=जुदाई, मसानु=मुर्दे जलाने की जगह)
7
फरीदा ए विसु गंदला धरीआं खंडु लिवाड़ि ॥
इकि राहेदे रहि गए इकि राधी गए उजाड़ि ॥37॥
इकि राहेदे रहि गए इकि राधी गए उजाड़ि ॥37॥
(ए=यह पदार्थ, विसु=ज़हर, खंडु लिवाड़ि=मीठे मे
लपेट कर, इकि=कई जीव, राहेदे=बीजते, रह गए=
थक गए,मर गए, राधी=बीजी हुई)
लपेट कर, इकि=कई जीव, राहेदे=बीजते, रह गए=
थक गए,मर गए, राधी=बीजी हुई)
8
फरीदा चारि गवाइआ हंढि कै चारि गवाइआ समि ॥
लेखा रबु मंगेसीआ तू आंहो केर्हे कमि ॥38॥
लेखा रबु मंगेसीआ तू आंहो केर्हे कमि ॥38॥
(हंढि कै=भटक कर,दौड़-भाग कर, समि=सो कर,
मंगेसीआ=मांगेगा, आंहो=आया था,
केर्हे कमि=किस काम)
मंगेसीआ=मांगेगा, आंहो=आया था,
केर्हे कमि=किस काम)
9
फरीदा दरि दरवाजै जाइ कै किउ डिठो घड़ीआलु ॥
एहु निदोसां मारीऐ हम दोसां दा किआ हालु ॥39॥
एहु निदोसां मारीऐ हम दोसां दा किआ हालु ॥39॥
(दरि=दरवाज़े पर, किउ डिठो=क्या नहीं देखा,
निदोसां=बिना दोष, मारिऐ=मार खाता है)
निदोसां=बिना दोष, मारिऐ=मार खाता है)
10
घड़ीए घड़ीए मारीऐ पहरी लहै सजाइ ॥
सो हेड़ा घड़ीआल जिउ डुखी रैणि विहाइ ॥40॥
सो हेड़ा घड़ीआल जिउ डुखी रैणि विहाइ ॥40॥
(घड़ीए घड़ीए=घड़ी घड़ी के बाद, पहरी=हरेक
पहर बाद में, सजाइ=सजा, हेड़ा=शरीर, जिउ=जैसे,
डुखी=दुखी, रैणि=रात, विहाइ=बीतती है)
पहर बाद में, सजाइ=सजा, हेड़ा=शरीर, जिउ=जैसे,
डुखी=दुखी, रैणि=रात, विहाइ=बीतती है)
11
बुढा होआ सेख फरीदु क्मबणि लगी देह ॥
जे सउ वर्हिआ जीवणा भी तनु होसी खेह ॥41॥
जे सउ वर्हिआ जीवणा भी तनु होसी खेह ॥41॥
(देह=शरीर, खेह=राख,मिट्टी, होसी=हो जाएगा)
12
फरीदा बारि पराइऐ बैसणा सांई मुझै न देहि ॥
जे तू एवै रखसी जीउ सरीरहु लेहि ॥42॥
जे तू एवै रखसी जीउ सरीरहु लेहि ॥42॥
(बारि पराइऐ=पराए दरवाज़े पर,
बैसणा=बैठना, एवै=इसी तरह, जीउ=जिंद,
सरीरहु=शरीर में से)
बैसणा=बैठना, एवै=इसी तरह, जीउ=जिंद,
सरीरहु=शरीर में से)
13
कंधि कुहाड़ा सिरि घड़ा वणि कै सरु लोहारु ॥
फरीदा हउ लोड़ी सहु आपणा तू लोड़हि अंगिआर ॥43॥
फरीदा हउ लोड़ी सहु आपणा तू लोड़हि अंगिआर ॥43॥
(कंधि=कंधे पर, सिरि=सिर पर, वणि=जंगल में,
कै सरु =बादशाह, हउ=मैं, सहु=खसम, लोड़हि=
चाहता है, अंगिआर=अंगारे)
कै सरु =बादशाह, हउ=मैं, सहु=खसम, लोड़हि=
चाहता है, अंगिआर=अंगारे)
14
फरीदा इकना आटा अगला इकना नाही लोणु ॥
अगै गए सिंञापसनि चोटां खासी कउणु ॥44॥
अगै गए सिंञापसनि चोटां खासी कउणु ॥44॥
(अगला=बहुत, लोणु=नमक, अगै=परलोक में,
सिंञापसनि=पहचाने जाएंगे)
सिंञापसनि=पहचाने जाएंगे)
15
पासि दमामे छतु सिरि भेरी सडो रड ॥
जाइ सुते जीराण महि थीए अतीमा गड ॥45॥
जाइ सुते जीराण महि थीए अतीमा गड ॥45॥
(पासि=पास, दमामे=धौंसे, छतु=छत्र, सिरि=
सिर पर, भेरी =तूतियां, सडो=बुला, रड=एक 'छंद'
का नाम है जो प्रशन्सा के लिए इस्तेमाल किया
जाता है, जीराण=मसाण, अतीमा=यतीम,बिन माँ
का बच्चा, गड थीए=रल गए)
सिर पर, भेरी =तूतियां, सडो=बुला, रड=एक 'छंद'
का नाम है जो प्रशन्सा के लिए इस्तेमाल किया
जाता है, जीराण=मसाण, अतीमा=यतीम,बिन माँ
का बच्चा, गड थीए=रल गए)
16
फरीदा कोठे मंडप माड़ीआ उसारेदे भी गए ॥
कूड़ा सउदा करि गए गोरी आइ पए ॥46॥
कूड़ा सउदा करि गए गोरी आइ पए ॥46॥
(मंडप=शामियाने, माड़ीआ=चुबारों वाले महल,
कूड़ा=झूठा, गोरी=गोरी,कब्रों में)
कूड़ा=झूठा, गोरी=गोरी,कब्रों में)
17
फरीदा खिंथड़ि मेखा अगलीआ जिंदु न काई मेख ॥
वारी आपो आपणी चले मसाइक सेख ॥47॥
वारी आपो आपणी चले मसाइक सेख ॥47॥
(खिंथड़ि=गोद, मेखा=टांके,मेखें,
अगलीआ=बहुत, मसाइक=शेख का बहु-वचन)
अगलीआ=बहुत, मसाइक=शेख का बहु-वचन)
18
फरीदा दुहु दीवी बलंदिआ मलकु बहिठा आइ ॥
गड़ु लीता घटु लुटिआ दीवड़े गइआ बुझाइ ॥48॥
गड़ु लीता घटु लुटिआ दीवड़े गइआ बुझाइ ॥48॥
(दुहु दीवी बलंदिआ=इन दोनों आंखों
के सामने ही, मलकु=मौत का फ़रिश्ता,
गड़ु=किला,शरीर, घटु=हृदय, लीता=कब्जा कर लिया)
के सामने ही, मलकु=मौत का फ़रिश्ता,
गड़ु=किला,शरीर, घटु=हृदय, लीता=कब्जा कर लिया)
19
फरीदा वेखु कपाहै जि थीआ जि सिरि थीआ तिलाह ॥
कमादै अरु कागदै कुंने कोइलिआह ॥
मंदे अमल करेदिआ एह सजाइ तिनाह ॥49॥
कमादै अरु कागदै कुंने कोइलिआह ॥
मंदे अमल करेदिआ एह सजाइ तिनाह ॥49॥
(जि=जो कुछ, थीआ=हुआ, सिरि=सिर पर,
कुंने=मिट्टी की हाँडी, सजाइ=दंड,
तिनाह=उन को, अमल=काम,करतूत)
कुंने=मिट्टी की हाँडी, सजाइ=दंड,
तिनाह=उन को, अमल=काम,करतूत)
20
फरीदा कंनि मुसला सूफु गलि दिलि काती गुड़ु वाति ॥
बाहरि दिसै चानणा दिलि अंधिआरी राति ॥50॥
बाहरि दिसै चानणा दिलि अंधिआरी राति ॥50॥
(कंनि=कंधे पर, सूफु=काली ख़फनी, गलि=गले में,
दिलि=दिल में)
दिलि=दिल में)
21
फरीदा रती रतु न निकलै जे तनु चीरै कोइ ॥
जो तन रते रब सिउ तिन तनि रतु न होइ ॥51॥
जो तन रते रब सिउ तिन तनि रतु न होइ ॥51॥
(रति=थोड़ी जितनी भी, रतु=लहु, रते=रंगे हुए,
सिउ=के साथ, तिन तनि=उनके तन में)
सिउ=के साथ, तिन तनि=उनके तन में)
22
इहु तनु सभो रतु है रतु बिनु तंनु न होइ ॥
जो सह रते आपणे तितु तनि लोभु रतु न होइ ॥
भै पइऐ तनु खीणु होइ लोभु रतु विचहु जाइ ॥
जिउ बैसंतरि धातु सुधु होइ तिउ हरि का भउ दुरमति मैलु गवाइ ॥
नानक ते जन सोहणे जि रते हरि रंगु लाइ ॥52॥
जो सह रते आपणे तितु तनि लोभु रतु न होइ ॥
भै पइऐ तनु खीणु होइ लोभु रतु विचहु जाइ ॥
जिउ बैसंतरि धातु सुधु होइ तिउ हरि का भउ दुरमति मैलु गवाइ ॥
नानक ते जन सोहणे जि रते हरि रंगु लाइ ॥52॥
(सभो=सारा ही, रतु बिनु=रक्त के बिना,
तनि=तन,शरीर, सह रते=खसम के साथ रंगे
हुए, तितु तनि=उस शरीर में, भै पइऐ=डर में
पड़ कर, खीणु=पतला,कमज़ोर, जाइ=दूर हो
जाती है, बैसंतरि =आग में, सुधु=साफ़, जि=
जो, रंगु=प्यार)
तनि=तन,शरीर, सह रते=खसम के साथ रंगे
हुए, तितु तनि=उस शरीर में, भै पइऐ=डर में
पड़ कर, खीणु=पतला,कमज़ोर, जाइ=दूर हो
जाती है, बैसंतरि =आग में, सुधु=साफ़, जि=
जो, रंगु=प्यार)
23
फरीदा सोई सरवरु ढूढि लहु जिथहु लभी वथु ॥
छपड़ि ढूढै किआ होवै चिकड़ि डुबै हथु ॥53॥
छपड़ि ढूढै किआ होवै चिकड़ि डुबै हथु ॥53॥
(सरवरु=सुंदर तालाब, वथु=चीज़)
24
फरीदा नंढी कंतु न राविओ वडी थी मुईआसु ॥
धन कूकेंदी गोर में तै सह ना मिलीआसु ॥54॥
धन कूकेंदी गोर में तै सह ना मिलीआसु ॥54॥
(नंढी=जवान स्त्री ने, वडी थी=बुढ़िया हो कर, मुईआसु=
वह मर गई, धन=स्त्री, गोर में=कब्र में, तै=तुझे, सह=पति,
न मिलिआसु=नहीं मिली)
वह मर गई, धन=स्त्री, गोर में=कब्र में, तै=तुझे, सह=पति,
न मिलिआसु=नहीं मिली)
25
फरीदा सिरु पलिआ दाड़ी पली मुछां भी पलीआं ॥
रे मन गहिले बावले माणहि किआ रलीआं ॥55॥
रे मन गहिले बावले माणहि किआ रलीआं ॥55॥
(पलिआ=सफ़ेद हो गया, रे गहले=हे गाफिल, बावले=
बेवकूफ, रलीआं=खुशियां)
बेवकूफ, रलीआं=खुशियां)
26
फरीदा कोठे धुकणु केतड़ा पिर नीदड़ी निवारि ॥
जो दिह लधे गाणवे गए विलाड़ि विलाड़ि ॥56॥
जो दिह लधे गाणवे गए विलाड़ि विलाड़ि ॥56॥
27
फरीदा कोठे मंडप माड़ीआ एतु न लाए चितु ॥
मिटी पई अतोलवी कोइ न होसी मितु ॥57॥
मिटी पई अतोलवी कोइ न होसी मितु ॥57॥
28
फरीदा मंडप मालु न लाइ मरग सताणी चिति धरि ॥
साई जाइ सम्हालि जिथै ही तउ वंञणा ॥58॥
साई जाइ सम्हालि जिथै ही तउ वंञणा ॥58॥
29
फरीदा जिन्ही कमी नाहि गुण ते कमड़े विसारि ॥
मतु सरमिंदा थीवही सांई दै दरबारि ॥59॥
मतु सरमिंदा थीवही सांई दै दरबारि ॥59॥
30
फरीदा साहिब दी करि चाकरी दिल दी लाहि भरांदि ॥
दरवेसां नो लोड़ीऐ रुखां दी जीरांदि ॥60॥
दरवेसां नो लोड़ीऐ रुखां दी जीरांदि ॥60॥
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