Monday, 3 December 2018

शेख फरीद के दोहे-1

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1

जितु दिहाड़ै धन वरी साहे लए लिखाइ ॥
मलकु जि कंनी सुणीदा मुहु देखाले आइ ॥
जिंदु निमाणी कढीऐ हडा कू कड़काइ ॥
साहे लिखे न चलनी जिंदू कूं समझाइ ॥
जिंदु वहुटी मरणु वरु लै जासी परणाइ ॥
आपण हथी जोलि कै कै गलि लगै धाइ ॥
वालहु निकी पुरसलात कंनी न सुणी आइ ॥
फरीदा किड़ी पवंदीई खड़ा न आपु मुहाइ॥1॥
(जितु दिहाड़ै=जिस दिन, धन=स्त्री, वरी=व्याही
जायेगी, साहे=विवाह का नियत समय, मलकु=मौत
का फ़रिश्ता, कूं=को, न चलनी =नहीं टल सकते,
वरु=दूल्हा, परणाइ=विवाह कर, जोलि कै=भेज कर,
कै गलि=किस के गले में, धाइ=दौड़ कर, वालहु=
वाल से, पुरसलात =पुल-सिरात, कंनी=कानों से,
किड़ी पवंदीई=आवाज़ आते, न मुहाइ=न लुटा)

2

फरीदा दर दरवेसी गाखड़ी चलां दुनीआं भति ॥
बंन्हि उठाई पोटली किथै वंञा घति ॥2॥
(गाखड़ी=मुश्किल, दरवेसी=फ़कीरी, दर=परमात्मा
दे दर की, भति=की तरह, बंन्हि=बाँध कर, वंञा=जाऊं,
घति=फैंक कर, पोटली=छोटी सी गाँठ)

3

किझु न बुझै किझु न सुझै दुनीआ गुझी भाहि ॥
सांईं मेरै चंगा कीता नाही त हं भी दझां आहि ॥3॥
(किझु=कुछ भी, बुझै=समझ आती, पता लगता,
गुझी=छुपी, भाहि=आग, सांईं मेरै=मेरे
सांईं ने, हं भी=मैं भी, दझां आहि=
सड़ जाता)

4

फरीदा जे जाणा तिल थोड़ड़े समलि बुकु भरी ॥
जे जाणा सहु नंढड़ा तां थोड़ा माणु करी ॥4॥
(तिल=स्वास, थोड़ड़े=बहुत थोड़े, संमलि =संभल
के, सहु=खसम -प्रभु, नंढड़ा=छोटा सा लड़का)

5

जे जाणा लड़ु छिजणा पीडी पाईं गंढि ॥
तै जेवडु मै नाहि को सभु जगु डिठा हंढि ॥5॥
(लड़ु=पल्ला, छिजणा=टूट जाना है, पीडी=पक्की, तै
जेवडु=तुम्हारे जितना, हंढि=फिर कर)

6


(अकलि लतीफु=बारीक समझ वाला, काले लेखु =मन्दे
करम, गिरीवान=अंदर)

7

फरीदा जो तै मारनि मुकीआं तिन्हा न मारे घुमि ॥
आपनड़ै घरि जाईऐ पैर तिन्हा दे चुमि ॥7॥
(तै=तुझे, तिन्हा=उन को, न मारे =न मार,
घुमि=लौट कर, आपनड़ै घरि=अपने घर में,
शांत अवस्था में, चुमि=चूम कर, जाईऐ=पहुँच जाते है)

8

फरीदा जां तउ खटण वेल तां तू रता दुनी सिउ ॥
मरग सवाई नीहि जां भरिआ तां लदिआ ॥8॥
(तउ=तुम्हारा, खटण वेल=कमाने का समय, रता=
रंगा हुआ,मस्त, सिउ=के साथ, मरग=मौत,
सवाई=बढ़ती गई, जां=जब, भरिआ=स्वास
पूरे हो गए, नीहि=नींव)

9

देखु फरीदा जु थीआ दाड़ी होई भूर ॥
अगहु नेड़ा आइआ पिछा रहिआ दूरि ॥9॥
(थीआ=हो गया है, जु=जो कुछ, भूर=सफ़ेद,
अगहु=अगला पासा, पिछा=पिछला पक्ष)

10

देखु फरीदा जि थीआ सकर होई विसु ॥
सांई बाझहु आपणे वेदण कहीऐ किसु ॥10॥
(जि थीया =जो कुछ हुआ है, सकर=शक्कर,मीठे
पदारथ, विसु=ज़हर,दुखदायी, वेदण=दुख)

11

फरीदा अखी देखि पतीणीआं सुणि सुणि रीणे कंन ॥
साख पकंदी आईआ होर करेंदी वंन ॥11॥
(पतीणीआं=पतली पड़ गई हैं, रीणे=खाली,बोले,
साख=टहनी,शरीर, पकंदी आईआ=पक्क
गयी है, वंन=रंग)

12

फरीदा कालीं जिनी न राविआ धउली रावै कोइ ॥
करि सांई सिउ पिरहड़ी रंगु नवेला होइ ॥12॥
(कालीं=जब केस काले थे, राविआ=माना,
धउली=धउले आए हुए, कोइ=कोई विरला,
पिरहड़ी=प्यार, नवेला=नया, रंगु=प्यार)

13

फरीदा काली धउली साहिबु सदा है जे को चिति करे ॥
आपणा लाइआ पिरमु न लगई जे लोचै सभु कोइ ॥
एहु पिरमु पिआला खसम का जै भावै तै देइ ॥13॥
(चिति करे=चित्त में टिकाए, पिरमु=प्यार, सभु कोइ=
हरेक जीव, जै=जिस को, तै=उस को)

14

फरीदा जिन्ह लोइण जगु मोहिआ से लोइण मै डिठु ॥
कजल रेख न सहदिआ से पंखी सूइ बहिठु ॥14॥
(लोइण=आँखें, सूइ=बच्चे, बहिठु=बैठने की जगह)

15

फरीदा कूकेदिआ चांगेदिआ मती देदिआ नित ॥
जो सैतानि वंञाइआ से कित फेरहि चित ॥15॥
(सैतानि=शैतान ने,मन ने, कूकेदिआ
चांगेदिआ=पुकार पुकार के समझाने पर भी,
से=वह बंदे, वंञाइआ =बिगड़ा हुआ है)

16

फरीदा थीउ पवाही दभु ॥
जे सांई लोड़हि सभु ॥
इकु छिजहि बिआ लताड़ीअहि ॥
तां साई दै दरि वाड़ीअहि ॥16॥
(थीउ=बन जा, पवाही=पहियों की,रस्ते की,
दभु=घास, जे लोड़हि=यदि तू ढूँढता है, सभु=
सब मे, इकु=किसी दूब के पौधे को,
छिजहि=तोड़ते हैं, बिआ=कई ओर,
लताड़ीअहि=लताड़े जाते हैं,
साई दै दरि=मालिक के दर पर,
वाड़ीअहि=तू ले जाया जाएगा)

17

फरीदा खाकु न निंदीऐ खाकू जेडु न कोइ ॥
जीवदिआ पैरा तलै मुइआ उपरि होइ ॥17॥
(खाकु=मिट्टी, जेडु=जितना,जैसा)

18

फरीदा जा लबु ता नेहु किआ लबु त कूड़ा नेहु ॥
किचरु झति लघाईऐ छपरि तुटै मेहु ॥18॥
(नेहु किआ=किसका प्यार,असली प्यार नहीं, कूड़ा=झूठा,
किचरु =कितनी देर, झति=समय, छपरि तुटै=टूटे हुए छप्पर
पर, मेहु=बारिश)

19

फरीदा जंगलु जंगलु किआ भवहि वणि कंडा मोड़ेहि ॥
वसी रबु हिआलीऐ जंगलु किआ ढूढेहि ॥19॥
(किआ भवहि=घूमने का क्या लाभ, वणि=जंगल में,
कंडा मोड़ेहि=क्यों लताड़ता है, वसी=बसता है, हिआलीऐ=
हृदय में, किआ ढूढेहि=तलाश का क्या लाभ)

20

फरीदा इनी निकी जंघीऐ थल डूंगर भविओम्हि ॥
अजु फरीदै कूजड़ा सै कोहां थीओमि ॥20॥
(इनी जंघीऐ=इन टांगों के साथ, डूंगर=
पहाड़, भविओम्हि=मैंने घूमा है, अजु=
बुढ़ापे में, फरीदै= फ़रीद को, थीओमि=
हो गया है, कूजड़ा=एक छोटा सा कुल्हड़)

21

फरीदा राती वडीआं धुखि धुखि उठनि पास ॥
धिगु तिन्हा दा जीविआ जिना विडाणी आस ॥21॥
(वडीआं=लम्बी, धुखि उठनि=सुलग उठते हैं, पास=
शरीर के अंग, विडाणी=बिगानी, धिगु=फटकार-योग्य)

22

फरीदा जे मै होदा वारिआ मिता आइड़िआं ॥
हेड़ा जलै मजीठ जिउ उपरि अंगारा ॥22॥
(वारिआ होदा =लुकाआ होता, मिता आइड़िआं=
आए मित्रों से, हेड़ा=शरीर,दिल,मांस, मजीठ जिउ=
मजीठ की तरह, जलै=जलता है)

23

फरीदा लोड़ै दाख बिजउरीआं किकरि बीजै जटु ॥
हंढै उंन कताइदा पैधा लोड़ै पटु ॥23॥
(बिजउरीआं=बिजौर के इलाके की, दाखु=
छोटा अंगूर, किकरि=कीकर का पेड़, हंढै=
पुराना, पैधा लोड़ै =पहनना चाहता है)

24

फरीदा गलीए चिकड़ु दूरि घरु नालि पिआरे नेहु ॥
चला त भिजै क्मबली रहां त तुटै नेहु ॥24॥
(रहां=अगर मैं रह पड़ूँ, त=तो, तुटै=टूटता है)

25

भिजउ सिजउ क्मबली अलह वरसउ मेहु ॥
जाइ मिला तिना सजणा तुटउ नाही नेहु ॥25॥
(अलह=ईश्वर के कारन, भिजउ=बेशक भीगे)

26

फरीदा मै भोलावा पग दा मतु मैली होइ जाइ ॥
गहिला रूहु न जाणई सिरु भी मिटी खाइ ॥26॥
(मै=मुझे, भोलावा=भ्रम, मतु होइ जाइ=
मत हो जाए, गहिला=लापरवाह,गाफिल, जाणई=
जानता)

27

फरीदा सकर खंडु निवात गुड़ु माखिओ मांझा दुधु ॥
सभे वसतू मिठीआं रब न पुजनि तुधु ॥27॥
(निवात=मिशरी, माखिओ=शहद, न पुजनि=नहीं
पहुंचते, तुधु=तुझे)

28

फरीदा रोटी मेरी काठ की लावणु मेरी भुख ॥
जिना खाधी चोपड़ी घणे सहनिगे दुख ॥28॥
(रोटी मेरी काठ=काठ की तरह सूखी रोटी, लावणु=
भाजी,नमकीन, घणे=बड़े, चोपड़ी=स्वादिष्ट,
घी-भीगी)

29

रुखी सुखी खाइ कै ठंढा पाणी पीउ ॥
फरीदा देखि पराई चोपड़ी ना तरसाए जीउ ॥29॥
(रुखी=बगैर दाल सब्ज़ी के, देखि=देख कर,
चोपड़ी=स्वादिष्ट,घी-भीगी)

30

अजु न सुती कंत सिउ अंगु मुड़े मुड़ि जाइ ॥
जाइ पुछहु डोहागणी तुम किउ रैणि विहाइ ॥30॥
(सिउ=के साथ, अंगु=शरीर, मुड़े मुड़ि जाइ=टूट रहा है,
डोहागणी=विधवा,परित्यक्ता, रैणि=रात)

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