Friday, 4 January 2019

घिर के आख़िर आज बरसी है घटा बरसात की, ghir ke aakhir aaj barsi hai ghata barsat ki

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घिर के आख़िर आज बरसी है घटा बरसात की
मैकदों में कब से होती थी दुआ बरसात की

मूजब-ए-सोज़-ओ- सुरूर-ओ-बायस-ए-ऐश-ओ-निशात
ताज़गी बख़्श-ए-दिल-ओ-जाँ है हवा बरसात की

शाम-ए-सर्मा दिलरुबा था, सुबह-ए-गर्मा ख़ुशनुमा
दिलरुबा तर, खुशनुमा तर है फ़ज़ा बरसात की

गर्मी-ओ-सर्दी के मिट जाते हैं सब जिससे मर्ज़
लाल लाल एक ऐसी निकली है दवा बरसात की

सुर्ख़ पोशिश पर है ज़र्द-ओ-सब्ज़ बूटों की बहार
क्यों न हों रंगीनियाँ तुझपर फ़िदा बरसात की

देखने वाले हुए जाते हैं पामाल-ए-हवस
देखकर छब तेरी ऐ रंगीं अदा बरसात की


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