Monday, 3 December 2018
दोहे शेख फरीद के Dohe Sheikh Farid 101-120
फ़रीदा सुता है त जाग, घना सवसीं गोर महं ॥
बिन अमलां सोहाग गलीं रब्ब ना पाईअह ॥101॥
फ़रीदा से दाड़्हियां कूड़ावियां जो सेतान भुचन्नि ॥
अहरन तले वदान ज्यूं दोजक खड़ि धरियन्नि ॥102
फ़रीदा सो दर सच्चा देह जित मन लबु जाह ॥
राज माल कह खउ अमालन वच लिखाह ॥103॥
फ़रीदा सो दर सच्चा सेव तूं जितु मुकलूब नी जाह ॥
रिज मस्सतक हड खउ अमल न विकन खाह ॥104॥
फ़रीदा है जिया खड़सी जबि ते कसीसी सुवुन्न ज्युं ॥
क्या दवसी तर जगु रैही कूड़ा थिया ॥105॥
फ़रीदा हाथी सोन अम्बारियां, पीछे कटक हज़ार ॥
जां सिर आवी आपने तां को मीत न यार ॥106॥
फ़रीद कदे आहो हेकड़ा अते हिन थीयो प्रगट ॥
एवीं पान मशाहरो जा लाय बैठो हट्ट ॥107॥
फ़रीद कडै आह ढंढोल्यां पाए मुठि कु हड ॥
जितु पंजरि बिरहा बसै मास कहां ते रड ॥108॥
फ़रीद कडै अह हिकड़ा अते हुन भी थीसी हिक ॥
यो पई टन्नां न करे तेही लायउस सिक ॥109॥
फ़रीद कडै अह केहड़ा अतै हुन भी थीसी हिक ॥
तेही लायअमु सिक ओ पई टन्ना ना करे ॥110॥
फ़रीदा करन हकूमत दुनी दी हाकम नाउ धरन्न ॥
अगे धाउल प्याद्यां पिछे कोत चलन्न ॥
चड़्ह चलन सुख वाहनी उपर चौर झुलन्न ॥
सेज विछावन पाहरू जिथे जाय सवन्न ॥
तिनां जनां दियां ढेरियां दूरों पईआं दिसन्न ॥111॥
फ़रीदा करंग ढंढोल्यां ऊुडन नाही थाउं ॥
हक ना चूडीं मैंडी जीभड़ी जितु घिनां हरि नाउं ॥112॥
फ़रीदा कारी कांबरी और कारी नस ॥
आपहै ही मर जाएंगे चोर बाघा बस ॥113॥
फ़रीदा काली मैडी कंमली काला मैडा वेस ॥
गुनही भर्या मू फिरां लोकु जाने दरवेस ॥114॥
फ़रीदा कापड़ रता पायह मजीठै कउन रता दरियावै ॥
बन्दा नाउ अलह दे रता सत बिन अवर न भावै ॥
भठ पई साहगती मजलस जित साहब चित न आवै ॥115॥
फ़रीदा क्या लुड़ चटे लट बी जायी चुंज वने ॥
जे तूं मरह पट तां केहा तेरा सु पिरी ॥116॥
फ़रीदा किथे से तैडे माउ प्यु जिनी तूं जण्योह ॥
तै देखद्यां लढ गए तूं अजे न पतीणोह ॥117॥
फ़रीदा कुरीऐ कुरीऐ वैद्या तले चाड़ा महरेरु ॥
देखै छिट छिट थीवदा मतु खिसेयी पेरु ॥118॥
फ़रीदा कूकेंदड़ा कूकु कदे तां रब सुणैसिया ॥
निकल वैसी फूकु तां फिर कूक न होसिया ॥119॥
फ़रीदा कूड़ न कायी सिझ्या, सचु न लगनि दागु ॥
हक पिरिया दी पलक दा सारी उमर सुहागु ॥120॥
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