Monday, 3 December 2018
दोहे शेख फरीद के Dohe Sheikh Farid 81-100
फरीदा ऐसा होइ रहु जैसा कख मसीति ॥
पैरां तले लिताड़ियां, तूं कदे न छोडैं प्रीत ॥81॥
फरीदा इह सहज दियां बूथियां रखियां रब सवार ॥
जां जां इस जहान मह तां तां देखह जार ॥82॥
फरीदा इह जो जंगल रुखड़े हरियलु पतु तिनहां ॥
पोथां लिख्या अरथु दा एकसु एकसु मांह ॥83॥
फरीदा इह तन भौकना नित नित दुखे कौन ॥
कन्नी बुज्जे दे रहां किती वगे पौन ॥84॥
फरीदा इह दम गए बाउरै, जागन दी करि रोप ॥
इह दम हीरै लाल नै, गिने शाह नूं सोंप ॥85॥
फरीदा इक वेहजे लून ब्या कसतूरी झुंग रवह ॥
बाहरि लाय सबून अन्दरि हच्छा न थीवह ॥86॥
फरीदा इकना मति खुदाय दी इकना मंग लई ॥
इक दिती मूल न धिन्नदे, ज्यूं पथर बून्द पई ॥87॥
फरीदा इके तां सिकन सिक, इक तां पुच्छ सकिन्दियां ॥
तिनहां पिछे न मुक, जो सिकन सार न जाणनी ॥88॥
फरीदा इकै लोड़ मकसदी इकै ता अलाह लोड़ ॥
दोहु बेड़ी न लतु धरि वंञी वखर बोड़ु ॥89॥
फरीदा इट सिराने गोर घर कीड़ा पवसी मासि ॥
कितड़्यां जुग जानगे पया इकतु पासि ॥90॥
फरीदा इन जहान बिचि ए त्रै चंगे टोल ॥
हथों डेवे नवि चले मुखों मिठा बोल ॥91॥
फरीदा एस जहान विच, तिन्ने टोल करेनि ॥
मिठा बोलन, निव चलन, हथहुं भि किझु देइन ॥92॥
फरीदा ए बह जांदियां घुथियां रखियां रब धवार ॥
जां जां इस जहान मे तां तां रब चितार ॥93॥
फरीदा एक मूरति लोयना एक मूरति दुइ सास ॥
एक मूरति घट दोइ है दो मूरति इक आस ॥94॥
फरीदा सजे सबर जिनां पाधियां, छुटे कबहूं बनी ॥
जिन्हां सिर परि वंञना तिनां कूड़ मनी ॥95॥
फरीदा साहब लोड़ह हभ्भ ॥
तां थीaुं पवाहे दभ्भ ॥
हक छिजह ब्या लताड़ियह ॥
ता साहब दे दर वाड़ियह ॥96॥
फरीदा सायया सिका वेख कै, लोक जाने दरवेस ॥
अन्दर भरिया मांसुली, बाहरि कूड़ा वेस ॥97॥
फरीदा सिका सिक सिकन्द्यां, सिकीं डीहे राति ॥
मैंडियां सिकां सभ पुजन्नि जा पिरिया पायी झाति ॥98॥
फरीदा सुखां कूं ढूंढेदियां डुख न बारी डेन्ह ॥
इक भरि भरि पूर लंघायनि ब्या पतन आइ खलेन्ह ॥99॥
फरीदा सुता अह नींदम पिवदो ईव ॥
जिन्नी नैन नीदावले से धनी मिलन्दे कीव ॥100॥
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