Monday, 3 December 2018
दोहे शेख फरीद के Dohe Sheikh Farid 121-40
फ़रीदा कोट ढठा गड़ु लुट्या डेरे पई कहाह ॥
जीवद्यां सुता रहआ मुया देयी दी राह ॥
अज कि कलि कि चहु दिनी मलक असाडी हेर ॥
कै जित को है हार्यो सौदा एहा वेर ॥121॥
फ़रीदा खेती उजड़ी सचे स्यु लिव लाय ॥
जे अधखाधी उबरह तां फल बहुतेरा पाय ॥122॥
फ़रीदा खाकु सन्दियां ढेरियां उपर मेले कख ॥
ओचै हो कोयी न आवयी इथे वंङे लख ॥123॥
फ़रीदा गुर बिन न वड्याईआं धन जोबन असगाह ॥
खाली सले धनी स्यु टिबे ज्यु मियाह ॥124॥
फ़रीदा घरे दमामे मउत दे सगलि जहान सुने ॥
जगु छतीह वपारे, घाहै वागु लुने ॥
नेजी बधे धांवदे, से भि मलक चुने ॥
चीरी आई चलना ज्युं ज्युं पवनि चुने ॥125॥
फ़रीदा चले बन कउं कुतब देव बहायो ॥
बाप चोर बाबे भेरिया चारो डारि बंधायो ॥126॥
फ़रीदा चले परदेस कउ कुतब जू के भांउ ॥
सांपां जोधां नाहरां तिन्नां दांत बंधाउ ॥127॥
फ़रीदा चुड़ेली स्युं रत्या दुनिया कूड़ा भेत ॥
एनी अखीं देखद्यां, उजड़ वंञह कूड़ा खेत ॥128॥
फ़रीदा छप्पर बद्धा कान्या, भए पुराने कक्ख ॥
से सज्जन क्युं वीसराह, गुन जिन्नां दे लक्ख ॥129॥
फ़रीदा जंगल ढूंढे संघना लंमे लुड़्या न वति ॥
तनु हुजरा दरगाह दा तिस विच झाती घति ॥130॥
फ़रीदा जंगल दिता सोवणा, अरु अंधयारी गोर ॥
मिटी मिटी रल गई उते पउसी होर ॥131॥
फ़रीदा जंघी निकयी थल ुगर भ्रम्योम ॥
मझ ससीती कूजड़ा सै कोहा थीउम ॥132॥
फ़रीदा जल झींगारन माझियां, थलि झींगारन मोर ॥
विधन राती आईआं, तिति निमानी गोरि ॥133॥
फ़रीदा जा जा रंग बाज़ार मैं सौदा ना कीतोम ॥
हट वारिया वथ घडां याद पइओमु ॥134॥
फ़रीदा जां जां जीवे तां तां फिरे अलक्खु ॥
दरगह सचा ता थीवे, जां खफनु मूल ना रख ॥135॥
फ़रीदा माउ महंडी कंमली जिन जीवन रख्या नाउं ॥
जा दिन पुने मौत दे, ना जीवन ना नाउं ॥136॥
फ़रीदा जागना ई तां जाग रातड़्ही हभ वेहाणियां ॥
जे मू मत्थे भाग पिरी विसारन ना करनि॥137॥
फ़रीदा जागना ई तां जागु रातड़ियां हभ वेहाणियां ॥
पिरी विसान ना करनु जे मू मत्थे भाग ॥138॥
फ़रीदा जाना ई तां जाग होयी आ परभात ॥
इस जागन नूं पछताएंगा घना सोवेंगा रात ॥139॥
फ़रीदा जे मैं पुछां हस के, सो मैं पूछन रोइ ॥
जग सभोयी ढूंड्यां, डुक्खां बाझु न कोइ ॥140॥
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