Monday, 3 December 2018
दोहे शेख फरीद के Dohe Sheikh Farid 141-60
फ़रीदा जित कलंमा लिखया, जे मैं होवां पासि ॥
कर मिन्नति कर जोदड़े, फिरी लिखावां रासि ॥141॥
फ़रीदा जितु मनि बिरहा उपजै तित तन कैसा मासु ॥
इतु तनि इह वी बहुत है हांडा चाग अरु मासु ॥142॥
फ़रीदा जिनी सबर कमाल जि कर कमावन कानिया ॥
हन्ने सन्दे बान खलक खाली न करै ॥143॥
फ़रीदा जे जाना दरवेसी डाखड़ी तां चला दुनियां भति ॥
बन्नि उठायी पोटली हुन वंझे किथै घति ॥144॥
फ़रीदा जे तूं दिल दरवेसे रख अकीदा सामना ॥
दरहीं सेती देख, मथा मोड़ ना कंड दे ॥145॥
फ़रीदा जे तूं वंञे हजु हज हभो ही जिया में ॥
लाह दिले दी लज सच्चा हाजी तां थीवें ॥146॥
फ़रीदा जे दाहड़ियां कुड़ायी सो संतान(शैतान) भुचैन ॥
अहरन तले वदाड़ जो दोजक खड़े धरीऐन ॥147॥
फ़रीदा जेते अवगुन मुझ मैं चंमी अन्दर वार ॥
घनी खुआरी हो रहे जे आनन बाहरवार ॥148॥
फ़रीदा जे दर लगे नेहु, सो दर नाहीं छडना ॥
आहन पवह भावैं मेहु, सिर ही उपर झल्लना ॥149॥
फ़रीदा टुभी मारन गाखड़ी सद्धरां लक्ख करेनि ॥
जिनां दा मन धुप्या, से मानक लभेनि ॥150॥
फ़रीदा ढेरी दिसै छार दी उपरि ढहरियां ॥
भी होदे मानवीं माणदे रलियां ॥151॥
फ़रीदा तत्ते ठंडे वंवसनि, सिर तांन जो अडि ॥
जे लोड़हं दीदार नो तां तन धर तल गडि ॥152॥
फ़रीदा तन हर्या मन फट्या, तागति रही न काय ॥
उठ पिरी तबीब थीउ, कारी दारूए लाय ॥153॥
फ़रीदा तिकल कासा काठ दा वासा विच वना ॥
बारी अन्दर जालना दरवेशा हरना ॥154॥
फ़रीदा तिन्ने टोल करेनि ॥
मिठा बोलन निवु चलन हथों भी कुछ देनि ॥155॥
फ़रीदा तूं तूं करेदे जो मुए मुए भी तू तू करन ॥
जिनी तूं तूं न किया तिनी न संझातो तन ॥
सांईं सन्दे नाखवे दायम पिरी रवन्नि ॥
रब्ब न भन्ने पोरियां मन्दे फ़कीरन ॥156॥
फ़रीदा दर भीड़ा घर संकड़ा गोर निबाहू नितु ॥
देख फ़रीदा जो थिया सो कलि चले मितु ॥157॥
फ़रीदा दरद जिन्हां दे दायरे दी इस सूल सहन्नि ॥
मंझे चड़्हहनि कहा हियां मंझे ही तलियन्नि ॥158॥
फ़रीदा दर वरसाईआ कानियां रब न घड़ीएनि ॥
लगन तिना मुनाफकां जो न कदर जणेनि ॥159॥
फ़रीदा दरद न वंञमि दारू जि लक्ख तबीब लगन्नि ॥
चंगी भली थी बहां, जो मूं पिरी मिलन्नि ॥160॥
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