Monday, 3 December 2018
दोहे शेख फरीद Dohe sheikh farid 41-60
कागदु घनो होरु मस घनो हमारो प्यार ॥
अंतरि हियरे बसि रहे कि लिखे प्यारे यार ॥41॥
कोट ढठा गढ लुट्या डेरे पए कहार ॥
जीवदिया होरे मामले फरीदा मुयां होरे हार ॥42॥
कूक फरीदा कूक तू, ज्युं राखा जुआर ॥
जब लग टांडा न गिरै तब लगि कूक पुकार ॥43॥
खाकां विचि गड़ी सन्ही पानी पीविन पुनै ॥
लिखी मुहलति चलना फरीदा जयूं जयूं पए सुनै ॥44॥
खिड़की खुली अरब दी खुलै सभ दवार ॥
मंग फरीदा मंगणां एहा मंगन बार ॥45॥
फरीदा खेती उजड़ी सचे सिaुं लिव लाय ॥
जे अध खाधी उबरे तां फल बहुतेरा पाय ॥46॥
चड़्ह चलनि सुखवास नी, उपरि चउर झुलन्नि ॥
सेज विछावन पाहरू, जिथे जाय सवन्नि ॥
तिनां जनां दियां ढेरियां, दूरहुं पईआं दिसन्नि ॥47॥
जसा सै रातीं वड्डियां डू डू गांढणियां ॥
तुम इक जालु न संघिया असां सभै जालणियां ॥48॥
जसा राती वडियां धूखि धूखि उडनि पास ॥
ध्रिग तिन्नां दा जीव्या जिन्हां विडानी आस ॥49॥
जंगल जाय बिलास कर, भुख न साड़ि सरीर ॥
भोजन शेख फरीद दा, जाली जंड करीर ॥50॥
जां जां रूह रुकू मैं तां तां देही नोरंग ॥
दाना पानी बावदा मसतकि लिखया अंग ॥51॥
जा मूं लगा नेहु, तां मैं डुख वेहाज्या ॥
झुरां हभो ही डेह, कारनि सचै मा पिअरी ॥52॥
जितु मुखि कदी न देदियां, तता भोजन वाति ॥
तिसह उपरि ढंढड़ी बलसि सरंग राति ॥53॥
जो दिता तै जिता रस पिया यूं लीन ॥
वारया तै हारया कहु सेख फरीद प्यार्या ॥54॥
जि इट सरान अते गोर घर कीड़ा लड़िअसी मास ॥
केतड़्यां जुग जाणगे जि पया इकते पास ॥55॥
जि फरीदा भनी घड़ी सुवनवीं अतै तुटै नगर लजु ॥
अजराईलु फरैसता भै घरि नाठी अजु ॥
घिन आया जिन्द कू केहा करेसी पजु ॥56॥
जिती खुसियां कीतियां तिती थियम रोग ॥
छिलु कारनि मारीऐ खाधै दा कि होगु ॥57॥
जिन्दगी दा वसाह नहीं समझ फरीदा तूं ॥
कर लै अच्छे अमल तूं हो जा सरनगूं ॥58॥
जिनी तूं तूं किया तिनी सिवातो तन्नि ॥
रब न पंठे खोर्या धन्दे फकीरन ॥59॥
जी जी जीवे दुनी ते खुरीए कही न लाय ॥
इको खरनु रखि कै होर सभे देइ लुटाय ॥60॥
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