Monday, 3 December 2018

सूही ललित

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बेड़ा बंधि न सकिओ बंधन की वेला ॥
भरि सरवरु जब ऊछलै तब तरणु दुहेला ॥१॥
हथु न लाइ कसु्मभड़ै जलि जासी ढोला ॥१॥ रहाउ ॥
इक आपीन्है पतली सह केरे बोला ॥
दुधा थणी न आवई फिरि होइ न मेला ॥२॥
कहै फरीदु सहेलीहो सहु अलाएसी ॥
हंसु चलसी डुमणा अहि तनु ढेरी थीसी 

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