Wednesday, 2 January 2019
गर्मियाँ शोख़ियाँ किस शान से हम देखते हैं garmiya shokhiya kis shan
गर्मियाँ शोख़ियाँ किस शान से हम देखते हैं
क्या ही नादानियाँ नादान से हम देखते हैं
ग़ैर से बोसा-ज़नी और हमें दुश्नामें
मुँह लिए अपना पशेमान से हम देखते हैं
फ़स्ल-ए-गुल अब की जुनूँ-ख़ेज़ नहीं सद-अफ़सोस
दूर हाथ अपना गिरेबान से हम देखते हैं
आज किस शोख़ की गुलशन में हिना-बंदी है
सर्व रक़्साँ हैं गुलिस्तान से हम देखते हैं
'अख़्तर'-ए-ज़ार भी हो मुसहफ़-ए-रुख़ पर शैदा
फ़ाल ये नेक है कुरआन से हम देखते हैं
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