Sunday, 16 December 2018

ब्रजलीला लख जण सुख पावाँ

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ब्रजलीला लख जण सुख पावाँ, ब्रजबणताँ सुखरासी। 
णाच्याँ गावाँ ताल बजावाँ, पावाँ आणद हाँसी। 
णन्द जसोदा पुन्न रो प्रगटह्याँ, प्रभु अविनासी। 
पीताम्बर कट उर बैजणताँ, कर सोहाँ री बाँसी।। 
मीराँ रे प्रभु गिरधरनागर, दरसण दीज्यो दासी।।

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